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ऑक्सी श्वसन कहाँ संपन्न होता है ? | 11 | पादपों में श्वसन | BIOLOGY | SCIENCE PUBLICATION | Doub...

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निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14'शान्ति! कहाँ हैं' - में कवि का भाव है

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14पद्यान्श में सामाजिक चिन्ह युक्त चरण है

To do a certain work , A and B work on alternate days, with B beginning the work on the first day.A can finish the work alone in 48 days. If the work gets completed in 11 1/3 days, then B alone can finish 4 times the same work in : / किसी निश्चित कार्य को करने के दौरान A और B एक के बाद एक दिन कार्य करते हैं तथा पहले दिन कार्य की शुरुआत B करता है | A इस कार्य को अकेले 48 दिनों में कर सकता है | यदि कार्य 11 1/3 दिनों में समाप्त होता है, तो B अकेले 4 गुना कार्य कितने दिनों में करेगा ?

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14कवि के अनुसार इस युद्धरत दुनिया में जी नहीं पाते हैं

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14 पद्यान्श की भाषा है

निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर उत्तर दीजिए: युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है, 1 युद्धों की ही एक कहानी 2 शान्तिा कहाँ है शान्ति? 3 यहाँ तो नित रिपुओं से लड़ना है 4 नित्य उलझना समरांगण में 5 सीना ताने अड़ना है 6 भोले-भाले सीधे-सादे 7 नहीं यहाँ पर जीने पाते 8 जो लड़ते, आगे बढ़ते हैं। वे ही जीवन-गाना गाए 10 नहीं मिली यह शान्त बैठने 11 को हमको अनमोल जवानी 12 युद्ध, निरंतर युद्ध विश्व है 13युद्धों की ही एक कहानी 14कवि विश्व को युद्धों की ही एक कहानी मानता है

If a shopkeeper sells a mixer at Rs 11,400, then he suffers a loss of 5%. At what price (in Rs) should he sell the mixer to gain 10%? अगर कोई दुकानदार 11,400 रूपये में मिक्सर बेचता है, तो उसे 5% का नुकसान होता है। 10% लाभ हासिल करने के लिए उसे मिक्सर को किस कीमत पर (रूपये में) बेचना चाहिए?

माइकलएंजेलो इटली के बहुत प्रसिद्ध शिल्पकार थे। वे बड़ी सुंदर मूर्तियाँ बनाते थे। लोगों ने पूछा कि आप इतनी सुदंर मूर्ति केसे गढ़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि मैं मूर्ति कहाँ गढ़ता हूँ। वह मूर्ति तो पहले से ही पत्थर में थी, मैंने तो सिर्फ पत्थर का फालतू हिस्सा हटा दिया तो मूर्ति प्रकट हो गयी! तो विद्यार्थी को अपना परिचय पाने में, स्व-भान होने में मदद करना ही शिक्षक का काम है। अब यह स्व-भान कैसे हो? कहते हैं, सेल्फ इज लाइक अरे-जो साइंस में माना जाता है कि प्रकाश की किरण अदृश्य होती है, वह आपको दिखाई देती है, वैसे हमारा जो 'स्व' है वह शून्य में, अभाव में समझ में नहीं आता। वह तब प्रकट होता है, जब मैं स्व-धर्म कर्तव्य-कर्म करता हूँ। कर्म करते-करते मुश्किल का जब मैं सामना करता हूँ तब मेरा रूप. मेरी शक्ति, मेरे स्व का मुझे पता चलता है। स्व-धर्म रूप कर्म करते हुए जो स्व मेरे सामने व्यक्त होता है, वही मेरी शिक्षा है। इसलिए शिक्षा दी नहीं जा सकती, बल्कि अंदर से अंकुरित होती है और उस प्रक्रिया में शिक्षक केवल बाहर से मदद करता है। जैसे पौधे के अंकुरित होने में, इसके प्रफुल्लित होने में सीधा हम कुछ नहीं कर सकते। परंतु बाहर से खाद-पानी देना, निराई करना, प्रकाश की व्यवस्था आदि कर सकते हैं। 'स्व' का प्रकाट्य में होता है।