Home
Class
ENGLISH GRAMMAR
तीव्र दहन का एक उदाहरण दीजिए। | कक्षा 8 ...

तीव्र दहन का एक उदाहरण दीजिए। | कक्षा 8 | दहन और ज्वाला | रसायन शास्त्र | संशय

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। नर समाज का भाग्य क्या है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। भाग्यवाद क्या है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 26 जग-जीवन में जो चिर महान, सौन्दर्य पूर्ण औ सत्यप्राण, मैं उसका प्रेमी बनूँ नाथ ! जिससे मानव-हित हो समान! मिले जावे जिसमें अखिल व्यक्ति! जिससे जीवन में मिले शक्ति छूटे भय-संशय, अन्ध-भक्ति, में वह प्रकाश बन सकूँ नाथ ! " " सुमित्रानन्दन पन्त कवि ने 'अखिल व्यक्ति' का प्रयोग क्यों किया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 26 जग-जीवन में जो चिर महान, सौन्दर्य पूर्ण औ सत्यप्राण, मैं उसका प्रेमी बनूँ नाथ ! जिससे मानव-हित हो समान! मिले जावे जिसमें अखिल व्यक्ति! जिससे जीवन में मिले शक्ति छूटे भय-संशय, अन्ध-भक्ति, में वह प्रकाश बन सकूँ नाथ ! " " सुमित्रानन्दन पन्त कवि ने कविता की पंक्तियों के अन्त में विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग क्यों किया है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 26 जग-जीवन में जो चिर महान, सौन्दर्य पूर्ण औ सत्यप्राण, मैं उसका प्रेमी बनूँ नाथ ! जिससे मानव-हित हो समान! मिले जावे जिसमें अखिल व्यक्ति! जिससे जीवन में मिले शक्ति छूटे भय-संशय, अन्ध-भक्ति, में वह प्रकाश बन सकूँ नाथ ! " " सुमित्रानन्दन पन्त कविता का मूल भाव क्या है?

The average weight of some students in a class was 58.4kg. When 5 students having the average weight 62.8 kg joined the class, the average weight of all the students in the class increased by 0.55 kg. The number of students initially in the class were: एक कक्षा में कुछ छात्रों का औसत वज़न 58.4 किलो ग्राम था | जब 62.8 किलो ग्राम औसत वज़न वाले 5 छात्र इस कक्षा में आते हैं, तो कक्षा के सभी छात्रों का औसत वज़न 0.55 किलो ग्राम बढ़ जाता है | आरंभ में कक्षा में छात्रों की संख्या कितनी थी ?

The pie-chart provided below gives the distribution of land (in a village) under various food crops. Study the pie-chart carefully and answer the questions. नीचे दिए गए वृत्तारेखा में विभिन खाद्य फसलों के ( एक गाँव में ) भूमि का वितरण दिखाया गया हैं। वृत्तारेखा का अध्ययन कीजिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए। If the production of rice is 5 times that of jowar and the production of jowar is 2 times that of bazra, then the ratio between the yield per acre of rice and bazra is यदि चावल का उत्पादन ज्वार का पांच गुना और ज्वार का उत्पादन बाजरे का दो गुना हो, तब चावल और बाजरे के प्रति एकड़ उत्पादन का अनुपात है-

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान नवीन तथ्यों के साथ किसका सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता?

इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है युवक चित्त को सबसे अधिक प्रभावित जिस शास्त्र ने किया है, वह है

The ratio of efficiencies of A , B and C is 7 : 5 : 8. Working together, they can complete a piece of work in 42 days. B and C worked together for 21 days and the remaining was completed by A alone. The whole work was completed in : A, B और C की कार्य क्षमता का अनुपात 7 : 5 : 8 है | एक साथ कार्य करते हुए, वे किसी कार्य को 42 दिनों में कर सकते हैं |B और C ने एक साथ 21 दिनों तक कार्य किया और शेष कार्य A ने पूरा किया | पूरा कार्य कितने दिनों में समाप्त हुआ ?