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तीन पौसेएक साथ फेंके जोते हैफ।योग कम – से कम6 आनेकी प्रायिकताज्ञात कीजिए। | 11 | प्रायिकता | M...

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When operated separately , pipe A takes 5 hours less than pipe B to fill a cistern, and when both pipes are operated together, the cistern gets filled in 6 hours. In how much time (in hours) will pipe B fill the cistern, if operated. पाइप A, जब अलग से संचालित किया जाता है तो टंकी को भरने के लिए पाइप B से 5 घंटे कम लेता है, और जब दोनों पाइप एक साथ संचालित होते हैं, तो टंकी 6 घंटे में भर जाता है। संचालित होने पर कितने घंटे (घंटों में) पाइप B, टंकी को भर देगा।

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। भाषण और वार्तालाप में क्या अन्तर है?

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। सुनकर समझने को कौन-सा तत्त्व प्रभावित करता है?

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। लेखक के अनुसार क्या महत्त्वपूर्ण है?

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। 'सुनने के लिए पुराना भूलना भी जरूरी है।' वाक्य है

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। यह जड़ी-बूटी तो आज बड़ी ......." है। वाक्य के रिक्त स्थान पर शब्द आएमा

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। 'पूर्वाग्रह' का सन्धि-विच्छेद है

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं हैं। सुनने के लिए पुराना । भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते हैं। दो कान इसलिए हैं कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें मुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है। सुनने की कला आज दुर्लभ होती जारी है। शोध बताते हैं कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20% ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10% ही याद रहता है। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है। इस गद्यांश में बुद्धि की कौन-सी महत्त्वपूर्ण शक्ति का उल्लेख है?

What is the sum of the digits of the least number which when divided by 15, 18 and 36 leaves the same reminder 9 in each case and is divisible by 11? सबसे कम संख्या के अंकों का योग क्या है जो 15, 18 और 36 से विभाजित करने पर प्रत्येक बार में 9 ही शेष देता है और 11 से विभाजित है