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ऐसे दो उदाहरण दीजिए जिनमें लगाए गए बल द्...

ऐसे दो उदाहरण दीजिए जिनमें लगाए गए बल द्वारा वस्तु की आकृति में परिवर्तन हो जाए। | 8 | बल और दा...

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The prices of two articles are in the ratio 4 : 5. If the price of the first article is increased by x% and that of the other is decreased by 30% , then the new prices of A and B will be in the ratio 10 : 7. The value of x is : दो वस्तुओं की कीमतें 4 : 5 के अनुपात में हैं | यदि पहली वस्तु की कीमत x % से बढ़ा दी जाए और दूसरी वस्तु की कीमत 30% से कम कर दी जाए, तो A और B की नयी कीमतों का अनुपात 10 : 7 हो जाता है |x का मान है :

The given table represents the number of engineers recruited by four companies A,B,C and D over the years. Study the table carefully and answer the questions that follows: The number of years in which the number of engineers recruited by company D is less than the average number of engineers recruited by company B in the given six years, is: दी गयी तालिका चार कंपनियों A, B, C और D के द्वारा इन वर्षों के दौरान भर्ती किये गए इंजीनियरों की संख्या दर्शाती है | इस तालिका का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें तथा इसके बाद पूछे गए प्रश्न का उत्तर दें | ऐसे कितने वर्ष हैं जिनमें कंपनी D के द्वारा भर्ती किये गए इंजीनियरों की संख्या दिए गए छः वर्षों की अवधि में कंपनी B के द्वारा भर्ती किये गए इंजीनियरों की औसत संख्या से कम है?

The Table presents the amount of milk (in litres) sold by two milkmen in eight days. यह तालिका दो दूध वालों के द्वारा आठ दिनों में बेचे गए दूध की मात्रा ( लीटर में ) को दर्शाती है | If A is the total amount (in litres) of milk sold by milkman 1 in day 2 and day 3 and B is the total amount (in litres) of milk sold by milkman 2 in day 7 and day 8 then (B-A) is equal to: यदि ग्वाला 1 के द्वारा दिन 2 और दिन 3 को बेचे गए दूध की कुल मात्रा A है और ग्वाला 2 के द्वारा दिन 7 और दिन 8 को बेचे गए दूध की कुल मात्रा ( लीटर में ) B है, तो ( B-A) का मान है:

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए: आज शिक्षक की भूमिका उपदेशक या ज्ञानदाता की-सी नहीं रही। वह तो मात्र एक प्रेरक है कि शिक्षार्थी स्वयं सीख सकें। उनके किशोर मानस को ध्यान में रखकर शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान अध्ययन-अध्यापन की परंपरागत विधियों से दो कदम आगे जाना पड़ेगा, ताकि शिक्षार्थी समकालीन यथार्थ और दिनप्रतिदिन बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानवमूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा ग्रहण कर सके। पाठगत बाधाओं को दूर करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। भाषा शिक्षण की कोई एक विधि नहीं हो सकती। जैसे मध्यकालीन कविता में अलंकार, छंदविधान, तुक आदि के प्रति आग्रह था किंतु आज लय और प्रवाह का महत्त्व है। कविता पढ़ाते समय कवि की युग चेतना के प्रति सजगता समझना आवश्यक है। निबंध में लेखक के दृष्टिकोण और भाषा-शैली का महत्त्व है और शिक्षार्थी को अर्थग्रहण की योग्यता का विकास जरूरी है। कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है। मूल्यांकन वस्तुतः सीखने की ही एक प्रणाली है. ऐसी प्रणाली जो रटंत प्रणाली से मुक्ति दिला सके। परंपरागत साँचे का अनुपालन न करे, अपना ढाँचा निर्मित कर सके। इसलिए यह गाँठ बाँध लेना आवश्यक है कि भाषा और साहित्य के प्रश्न बँधे-बँधाए उत्तरों तक सीमित नहीं हो सकते। शिक्षक पूर्वनिर्धारित उत्तर की अपेक्षा नहीं कर सकता। विद्यार्थियों के उत्तर साँचे से हटकर किंतु तर्क संगत हो सकते हैं और सही भी। इस खुलेपन की चुनौती को स्वीकारना आवश्यक है। कहानी के द्वारा लेखन विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की कुशलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण गतिविधि हो सकती है।

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। आज शिक्षक की भूमिका उपदेशक या ज्ञानदाता की-सी नहीं रही। वह तो मात्र एक प्रेरक है कि शिक्षार्थी स्वयं सीख सकें। उनके किशोर मानस को ध्यान में रखकर शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान अध्ययन-अध्यापन की परंपरागत विधियों से दो कदम आगे जाना पड़ेगा, ताकि शिक्षार्थी समकालीन यथार्थ और दिनप्रतिदिन बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानवमूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा ग्रहण कर सके। पाठगत बाधाओं को दूर करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। भाषा शिक्षण की कोई एक विधि नहीं हो सकती। जैसे मध्यकालीन कविता में अलंकार, छंदविधान, तुक आदि के प्रति आग्रह था किंतु आज लय और प्रवाह का महत्त्व है। कविता पढ़ाते समय कवि की युग चेतना के प्रति सजगता समझना आवश्यक है। निबंध में लेखक के दृष्टिकोण और भाषा-शैली का महत्त्व है और शिक्षार्थी को अर्थग्रहण की योग्यता का विकास जरूरी है। कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है। मूल्यांकन वस्तुतः सीखने की ही एक प्रणाली है, ऐसी प्रणाली जो रटंत प्रणाली से मुक्ति दिला सके। परंपरागत साँचे का अनुपालन न करे, अपना ढाँचा निर्मित कर सके। इसलिए यह गाँठ बाँध लेना आवश्यक है कि भाषा और साहित्य के प्रश्न बँधे-बँधाए उत्तरों तक सीमित नहीं हो सकते। शिक्षक पूर्वनिर्धारित उत्तर की अपेक्षा नहीं कर सकता। विद्यार्थियों के उत्तर साँचे से हटकर किंतु तर्क संगत हो सकते हैं और सही भी। इस खुलेपन की चुनौती को स्वीकारना आवश्यक है। कहानी के द्वारा लेखन विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की कुशलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण गतिविधि हो सकती है।

The Table presents the amount of milk (in litres) sold by two milkmen in eight days. यह तालिका दो दूध वालों के द्वारा आठ दिनों में बेचे गए दूध की मात्रा ( लीटर में ) को दर्शाती है | The total amount of milk (in litres) sold by milkman 2 in all 8 days is what percent (correct to one decimal place) more than the total amount of milk sold by milkman 1 in first six days? ग्वाला 2 के द्वारा 8 दिनों में बेचे गए दूध की कुल मात्रा ( लीटर में ) पहले छः दिनों में ग्वाला 1 के द्वारा बेचे गए दूध की कुल मात्रा से कितना प्रतिशत एक दशमलव स्थान तक ) अधिक है ?