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PHYSICS - GS
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(ए) चुंबकत्व के लिए गॉस का नियम बताएं। इसका महत्व स्पष्ट करें। (बी) चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव लिखें...

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आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा में प्रमुख अन्तर किससे सम्बन्धित है?

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। इक' प्रत्यय का उदाहरण है

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। समस्याओं का हल खोजने पर आधारित अध्ययन किस विषय से जुड़ा था?

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। किन बच्चों ने सवाल हल करने में मौखिक गणना का ज्यादा प्रयोग किया?

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। संयुक्त क्रिया का उदाहरण है

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। मनगणित' का अर्थ है

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। अनुछेद के आधार पर बताइए कि सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश ज्ञान को

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। दुकानदार बच्चे हिसाब लगाने में भाषा गलती नहीं करते क्योंकि

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। जो दक्षताएँ हमारे दैनिक जीवन में काम नहीं आती उनमें हमारा प्रदर्शन अक्सर