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टाइगर किंग नज़ारे | पूरा सारांश हिंदी मे...

टाइगर किंग नज़ारे | पूरा सारांश हिंदी में समझाया गया | कक्षा 12 अंग्रेजी भूमिका मैम द्वारा

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In a class of 100 students, every student has passed in one or more of the three subjects, i.e. History, Economics and English. Among all the students , 24 students have passed in English only , 14 students have passed in History only, 11 students have passed in both English and Economics only, and 12 students have passed in both English and History only. A total of 50 students have passed in History. If only 5 students have passed in all three subjects, then how many students have passed in Economics only? 100 छात्रों की एक कक्षा में, प्रत्येक छात्र तीन विषयों यानी इतिहास, अर्थशास्त्र तथा अंग्रेजी में से एक या अधिक विषय में पास हुआ है | सभी छात्रों में से, 24 छात्र केवल अंग्रेजी में पास हुए हैं, 11 छात्र अंग्रेजी तथा अर्थशास्त्र दोनों में पास हुए हैं तथा 12 छात्र केवल अंग्रेजी और इतिहास में पास हुए हैं | इतिहास में कुल 50 छात्र पास हुए हैं | यदि सभी तीन विषयों में केवल 5 ही छात्र पास हुए हैं, तो केवल अर्थशास्त्र में पास करने वाले छात्रों की संख्या कितनी है ?

A can complete a work in 20 days and B in 22 1/2 days. They both work together for 6 days and the remaining work is completed by C in 26 days. In how many days the work will be completed, if all the three work together? / किसी कार्य को A, 20 दिनों में पूरा कर सकता है और B उसे 22 1/2 दिनों में पूरा कर सकता है | वे दोनों मिलकर 6 दिनों तक एक साथ कार्य करते हैं और शेष कार्य को C द्वारा 26 दिनों में पूरा किया गया है | तीनों एक साथ मिलकर उसी कार्य को कितने दिनों में पूरा करेंगे?

A and B together can do a piece of work in 12 days which B and C together can do in 16 days. After A has been working at it for 5 days and B for 7 days, C finishes it in 13 days. In how many days B could finish the work? A और B मिलकर एक काम 12 दिन में कर सकते हैं जसे B और C मिलकर 16 दिन में कर सकते हैं। A द्वारा उस पर 5 दिन और B द्वारा 7 दिन करने के बाद C ने उसे 13 दिन में पूरा कर दिया। B उस काम को कितने दिन में पूरा कर सकता था? Options are (a) 48 day/ 48 दिन (b)24 day/ 24 दिन (c)16 day/ 16 दिन (d)12 day/ 12 दिन

The given pie Chart (angles are not as per chosen scale) presents the marks scored by Amit in five subjects. Maximum marks in each subject = 100 Total score of Amit = 450 दिया गया वृत्त-आरेख ( कोण किसी चयनित पैमाने के अनुसार नहीं हैं ) पांच विषयों में अमित के द्वारा प्राप्त किये गए अंकों को दर्शाता है | प्रत्येक विषय के अधिकतम अंक = 100 अमित का कुल प्राप्तांक =450 What is the difference between the marks scored by Amit in Hindi and Maths? अमित के द्वारा हिंदी और गणित में प्राप्त किये गए अंकों में क्या अंतर है?

The given pie Chart (angles are not as per chosen scale) presents the marks scored by Amit in five subjects. Maximum marks in each subject = 100 Total score of Amit = 450 दिया गया वृत्त-आरेख ( कोण किसी चयनित पैमाने के अनुसार नहीं हैं ) पांच विषयों में अमित के द्वारा प्राप्त किये गए अंकों को दर्शाता है | प्रत्येक विषय के अधिकतम अंक = 100 अमित का कुल प्राप्तांक =450 The total marks scored by Amit in English and S. Studies is what percent (correct to one decimal place) more than the marks scored by him in Maths? अमित के द्वारा अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान में प्राप्त किये गए कुल अंक उसके द्वारा गणित में प्राप्त किये गए अंकों से कितना प्रतिशत अधिक हैं ? ( एक दशमलव स्थान तक )

The given pie chart shows the marks obtained in an examination by a student (in degrees). Observe the pie chart and answer the question that follows: दिया गया पाई चार्ट एक छात्र द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। पाई चार्ट का निरीक्षण करें और निम्न प्रश्न का उत्तर दें: If the total marks are 720, then the difference between the total marks obtained in Physics, Maths and Physical Education and the total marks in Chemistry, Biology and English out of the total marks is यदि कुल अंक 720 हैं, तो भौतिक विज्ञान, गणित और शारीरिक शिक्षा में प्राप्त कुल अंकों और कुल अंकों में से रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और अंग्रेजी में कुल अंकों के बीच का अंतर है:

प्राचीन भारत में स्त्रियों की सामाजिक परिस्थिति से सम्बन्धित अधिकांश अकादमिक अध्ययन ब्राह्मण साहित्य पर आधारित है। इस साहित्य में धार्मिक और वैधानिक बिन्दुओं पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है। धार्मिक कर्मकाण्ड सम्पादित करने का अधिकार, कर्मकाण्ड-सम्पादन का उद्देश्य, विधवाओं के अधिकार, पुनर्विवाह, नियोग संस्था की प्रासंगिकता, सम्पत्ति का अधिकार आदि कुछ ऐसे उल्लेखनीय बिन्दु हैं, जिन पर विशद् चर्चा की गई है। स्त्रियों की शिक्षा-दीक्षा, सार्वजनिक गतिविधियाँ सामाजिक समारोहों में उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति स्त्रियों की सामाजिक स्थिति के आकलन के महत्त्वपूर्ण आधार रहे हैं। स्त्रियों के अधिकार सम्बन्धी अधिकांश चर्चा परिवार को केन्द्र में रखकर, परिवार के सदस्य के रूप में पारिवारिक भूमिकाओं के निर्वहन के सन्दर्भ में की गई है। ज्यादातर उल्लेख पत्नी की भूमिका और पली के रूप में दिए जाने वाले अधिकार से सम्बन्धित हैं। ऐसे सन्दर्भ न के बराबर हैं, जिनमें समाज के एक स्वतन्त्र सदस्य के रूप में स्त्री अधिकारों की चर्चा की गई हो या उस पर विचार-विमर्श किया गया हो। गणिकाओं को इस सन्दर्भ में अपवाद माना जा सकता है, किन्तु ब्राह्मण साहित्य पितृवंशीय समाज में स्त्री अधिकारों को सन्दर्भित करता है। गणिकाओं को इस समाज का अंग नहीं माना गया है। चूंकि स्त्रियों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति का ये पूरा प्रारम्भिक विवेचन ब्राह्मण ग्रन्थों पर आधारित था, इसलिए यह सिर्फ ब्राह्मणवादी नजरिए को प्रस्तुत करता है। ब्राह्मणेत्तर (श्रमणिक) नजरिये से हमें परिचित नहीं कराता, इसलिए ऐसी कोई अवधारणा बनाना कि समाज में इन नियमों का शब्दशः पालन होता रहा होगा गलत होगा। वास्तविक समाज निश्चय ही इन ग्रन्थों की अपेक्षाओं के आदर्श समाज से अलग रहा होगा। निम्नलिखित में से किसे इस समाज का अंग नहीं माना गया था?

प्राचीन भारत में स्त्रियों की सामाजिक परिस्थिति से सम्बन्धित अधिकांश अकादमिक अध्ययन ब्राह्मण साहित्य पर आधारित है। इस साहित्य में धार्मिक और वैधानिक बिन्दुओं पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है। धार्मिक कर्मकाण्ड सम्पादित करने का अधिकार, कर्मकाण्ड-सम्पादन का उद्देश्य, विधवाओं के अधिकार, पुनर्विवाह, नियोग संस्था की प्रासंगिकता, सम्पत्ति का अधिकार आदि कुछ ऐसे उल्लेखनीय बिन्दु हैं, जिन पर विशद् चर्चा की गई है। स्त्रियों की शिक्षा-दीक्षा, सार्वजनिक गतिविधियाँ सामाजिक समारोहों में उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति स्त्रियों की सामाजिक स्थिति के आकलन के महत्त्वपूर्ण आधार रहे हैं। स्त्रियों के अधिकार सम्बन्धी अधिकांश चर्चा परिवार को केन्द्र में रखकर, परिवार के सदस्य के रूप में पारिवारिक भूमिकाओं के निर्वहन के सन्दर्भ में की गई है। ज्यादातर उल्लेख पत्नी की भूमिका और पली के रूप में दिए जाने वाले अधिकार से सम्बन्धित हैं। ऐसे सन्दर्भ न के बराबर हैं, जिनमें समाज के एक स्वतन्त्र सदस्य के रूप में स्त्री अधिकारों की चर्चा की गई हो या उस पर विचार-विमर्श किया गया हो। गणिकाओं को इस सन्दर्भ में अपवाद माना जा सकता है, किन्तु ब्राह्मण साहित्य पितृवंशीय समाज में स्त्री अधिकारों को सन्दर्भित करता है। गणिकाओं को इस समाज का अंग नहीं माना गया है। चूंकि स्त्रियों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति का ये पूरा प्रारम्भिक विवेचन ब्राह्मण ग्रन्थों पर आधारित था, इसलिए यह सिर्फ ब्राह्मणवादी नजरिए को प्रस्तुत करता है। ब्राह्मणेत्तर (श्रमणिक) नजरिये से हमें परिचित नहीं कराता, इसलिए ऐसी कोई अवधारणा बनाना कि समाज में इन नियमों का शब्दशः पालन होता रहा होगा गलत होगा। वास्तविक समाज निश्चय ही इन ग्रन्थों की अपेक्षाओं के आदर्श समाज से अलग रहा होगा। प्राचीन भारत में स्त्रियों की क्या स्थिति थी, यह जानने का स्रोत है।

प्राचीन भारत में स्त्रियों की सामाजिक परिस्थिति से सम्बन्धित अधिकांश अकादमिक अध्ययन ब्राह्मण साहित्य पर आधारित है। इस साहित्य में धार्मिक और वैधानिक बिन्दुओं पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है। धार्मिक कर्मकाण्ड सम्पादित करने का अधिकार, कर्मकाण्ड-सम्पादन का उद्देश्य, विधवाओं के अधिकार, पुनर्विवाह, नियोग संस्था की प्रासंगिकता, सम्पत्ति का अधिकार आदि कुछ ऐसे उल्लेखनीय बिन्दु हैं, जिन पर विशद् चर्चा की गई है। स्त्रियों की शिक्षा-दीक्षा, सार्वजनिक गतिविधियाँ सामाजिक समारोहों में उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति स्त्रियों की सामाजिक स्थिति के आकलन के महत्त्वपूर्ण आधार रहे हैं। स्त्रियों के अधिकार सम्बन्धी अधिकांश चर्चा परिवार को केन्द्र में रखकर, परिवार के सदस्य के रूप में पारिवारिक भूमिकाओं के निर्वहन के सन्दर्भ में की गई है। ज्यादातर उल्लेख पत्नी की भूमिका और पली के रूप में दिए जाने वाले अधिकार से सम्बन्धित हैं। ऐसे सन्दर्भ न के बराबर हैं, जिनमें समाज के एक स्वतन्त्र सदस्य के रूप में स्त्री अधिकारों की चर्चा की गई हो या उस पर विचार-विमर्श किया गया हो। गणिकाओं को इस सन्दर्भ में अपवाद माना जा सकता है, किन्तु ब्राह्मण साहित्य पितृवंशीय समाज में स्त्री अधिकारों को सन्दर्भित करता है। गणिकाओं को इस समाज का अंग नहीं माना गया है। चूंकि स्त्रियों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति का ये पूरा प्रारम्भिक विवेचन ब्राह्मण ग्रन्थों पर आधारित था, इसलिए यह सिर्फ ब्राह्मणवादी नजरिए को प्रस्तुत करता है। ब्राह्मणेत्तर (श्रमणिक) नजरिये से हमें परिचित नहीं कराता, इसलिए ऐसी कोई अवधारणा बनाना कि समाज में इन नियमों का शब्दशः पालन होता रहा होगा गलत होगा। वास्तविक समाज निश्चय ही इन ग्रन्थों की अपेक्षाओं के आदर्श समाज से अलग रहा होगा। स्त्रियों के अधिकार सम्बन्धी अधिकांश चर्चा किसको केन्द्र में रखकर की गई है?