शक्ति की SI इकाई बताएं और परिभाषित करें। | 10 | कार्य ऊर्जा एवं शक्ति | भौतिकी | आईसीएसई | संदेह...
शक्ति की SI इकाई बताएं और परिभाषित करें। | 10 | कार्य ऊर्जा एवं शक्ति | भौतिकी | आईसीएसई | संदेह...
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24 persons working 8 hours a day can complete 2 units of a work in 10 days. How many persons are required to complete 4 units of that work, if they work 6 hours a day for 16 days? एक दिन में 8 घंटे कार्य करते हुए 24 व्यक्ति किसी कार्य की 2 इकाई 10 दिनों में समाप्त कर सकते हैं | इस कार्य की 4 इकाई समाप्त करने के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी यदि वे 16 दिनों तक एक दिन में 6 घंटे कार्य करते हैं ?
Recap |विद्युत ऊर्जा एवं विद्युत शक्ति|OMR|Summary
Recap|विद्युत ऊर्जा एवं विद्युत शक्ति |प्रश्न |Summary
18 persons working 8 hours a day can complete 3 units of works in 10 days. How many persons are required to complete 5 units of that work in 16 days working 6 hours a day? एक दिन में 8 घंटे कार्य करते हुए 18 व्यक्ति किसी कार्य की 3 इकाई 10 दिनों में समाप्त कर सकते हैं | प्रतिदिन 6 घंटे कार्य करते हुए 16 दिन में इस कार्य की 5 इकाई समाप्त करने के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। गिजुभाई ने केवल बच्चों की क्षमताओं, बैद्धिकता में विश्वास व्यक्त करते हैं अपितु वे उनकी सर्जनात्मकत्ता में भी अगाध आस्था रखते हैं। उनके अनुसार कुछ हत्याएँ पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आती। उनमें कानूनवेत्ताओं की न्याय नीति-संबंधी मर्यादाएँ सिर्फ पीनल कोड से बँधी होती हैं। शिक्षाशास्त्रियों के पास राज्य, रूढ़ि अथ्वा धर्म की कोई सत्ता नहीं है इसलिए जीवन के प्रति जो अपराध होते हैं उनके लिए न कोई पीनल कोड, न कोई उन्हें निंदनीय मानता, न कोई धार्मिक भय है। जीवन के प्रति होने वाला एक ऐसा ही अपराध है -बालक की सृजन-शक्ति की हत्या। ईश्वर ने मनुष्य का सृजन किया और उसे अपनी सृजन-शक्ति प्रदान की। मनुष्य के सृजन की अनंत शक्ति के समान ही अगणित है। साहित्य एक सृजन है, चित्रकला दूसरा सृजन है, संगीत तीसरा सृजन है और स्थापत्य चौथा सृजन है। इस तरह गिनने बैठा जाए तो मनुष्य के द्वारा बनाई गई अनेकानेक कृतियों को गिनाया जा सकता है। जब शिक्षक या अभिभावक यह तय करते हैं कि बच्चे को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए-वस्तुतः इन निर्णयों में ही वे बालक की सृजन-शक्ति का दमन कर देते हैं। 'बच्चे क्या करें और क्या न करें' जब शिक्षक और अभिभावक यह तय करते हैं तब
गिजुभाई ने केवल बच्चों की क्षमताओं, बैद्धिकता में विश्वास व्यक्त करते हैं अपितु वे उनकी सर्जनात्मकता में भी अगाध आस्था रखते हैं। उनके अनुसार कुछ हत्याएँ पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आती। उनमें कानूनवेत्ताओं की न्याय नीति-संबंधी मर्यादाएँ सिर्फ पीनल कोड से बँधी होती हैं। शिक्षाशास्त्रियों के पास राज्य दिन अथवा धर्म की कोई सत्ता नहीं है इसलिए जीवन के प्रति, जो अपराधं होते हैं उनके लिए न कोई पीनल कोड न कोई उन्हें निंदनीय मानता, न कोई धार्मिक भय है। जीवन के प्रति होने वाला एक ऐसा ही अपराध है / बालक की सृजन-शक्ति की हत्या । ईश्वर ने मनुष्य का सृजन किया और उसे अपनी संजन-शक्ति प्रदान । की। मनुष्य के सृजन की अनंत शक्ति के समान ही अगणित है। साहित्य एक सृजन है, चित्रकला दूसरा सृजन है, संगीत तीसरा सृजनः । है और स्थापत्य चौथा सृजन है। इस तरह गिनने बैठा जाए तो मनुष्यः । के द्वारा बनाई गई अनेकानेक कृतियों को गिनाया जा सकता है। जब शिक्षक या अभिभावक यह तय करते हैं कि बच्चे को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए - वस्तुतः इन निर्णयों में ही वे बालक की सृजन-शक्ति का दमन कर देते हैं। 'बच्चे क्या करें और क्या न करें जब शिक्षक और अभिभावक यह तय करते हैं तब
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। गिजुभाई ने केवल बच्चों की क्षमताओं, बैद्धिकता में विश्वास व्यक्त करते हैं अपितु वे उनकी सर्जनात्मकता में भी अगाध आस्था रखते हैं। उनके अनुसार कुछ हत्याएँ पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आती। उनमें कानूनवेत्ताओं की न्याय नीति-संबंधी मर्यादाएँ सिर्फ पीनल कोड से बँधी होती हैं। शिक्षाशास्त्रियों के पास राज्य, रूढ़ि अथवा धर्म की कोई सत्ता नहीं है इसलिए जीवन के प्रति जो अपराध होते हैं उनके लिए न कोई पीनल कोड, न कोई उन्हें निंदनीय मानता, न कोई धार्मिक भय है। जीवन के प्रति होने वाला एक ऐसा ही अपराध है- बालक की सृजन-शक्ति की हत्या। ईश्वर ने मनुष्य का सृजन किया और उसे अपनी सृजन-शक्ति प्रदान की। मनुष्य के सृजन की अनंत शक्ति के समान ही अगणित है। साहित्य एक सृजन है, चित्रकला दूसरा सृजन है, संगीत तीसरा सृजन है और स्थापत्य चौथा सृजन है। इस तरह गिनने बैठा जाए तो मनुष्य के द्वारा बनाई गई अनेकानेक कृतियों को गिनाया जा सकता है। जब शिक्षक या अभिभावक यह तय करते हैं कि बच्चे को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए वस्तुतः इन निर्णयों में ही वे बालक की सृजन-शक्ति का दमन कर देते हैं। 'बच्चे क्या करें और क्या न करें' जब शिक्षक और अभिभावक यह तय करते हैं तब-
The efficiencies of A, B and C are in the ratio 2 : 5 : 7 working together, they can complete a work in 10 days. In how many days will, A alone be able to complete 30% of that work? A, B और C की कार्य क्षमता 2 : 5: 7 के अनुपात में है | एक साथ कार्य करते हुए वे किसी कार्य को 10 दिनों में समाप्त कर सकते हैं | इस कार्य का 30% भाग समाप्त करने में A को अकेले कितना समय (दिन ) लगेगा ?
ऊर्जा|यांत्रिक ऊर्जा|गतिज ऊर्जा|संवेग और गति ऊर्जा में संबंध|कार्य ऊर्जा प्रमेय|स्थितिज ऊर्जा|शक्ति|यूनिट|बल और वेग के पदों में शक्ति|अभ्यास प्रश्न
दृढ़ पिंड|दृढ़ पिंड का द्रव्यमान केंद्र|दृढ़ पिंड की सामान्य गति|घूर्णी गति|सामान्य गति|बल आघूर्ण|घूर्णी गति के कार्य एवं शक्ति|घूर्णी गति के समीकरण|One Minute Revision
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