क्या ऐनी सही थी जब उसने कहा था कि दुनिया को तीस लोगों के विचारों में कोई दिलचस्पी नहीं होगी...
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बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती। उनके लिए दुनिया है और वे इस दुनिया में आना चाहते हैं। बच्चों को यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि यह दुनिया इतनी बेकार है, यहाँ करने के काबिल कुछ भी नहीं है और इससे बचकर कितना दूर भागा जा सकता है। संभवतः सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि न्यू लिटिल स्कूल के शिक्षक खुले और सच्चे हैं अर्थात, ये लोग उन सभी विषयों पर बात करने के लिए तत्पर रहते हैं जिन पर बच्चे बात करना चाहते हैं। वे अपने सच्चे विचार प्रकट करते हैं और कोई बात अगर वे नहीं जानते तो स्वीकार कर लेते हैं। ज्यादातर शिक्षकों के साथ ऐसा नहीं है। सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि 90 प्रतिशत अमेरिकी शिक्षक विवादास्पद विषयों के बारे में स्कूल में बात करने में विश्वास नहीं करते तथा बच्चों को भी इन विषयों के बारे में बात नहीं करने देते। हालाँकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि बच्चों की इन विषयों में सबसे अधिक रुचि होती है। इसलिए पारंपरिक स्कूलों में बच्चे ज्यादा बात नहीं कर सकते और ईमानदारी से नहीं कर सकते। इसके अलावा शिक्षकों को प्रशिक्षण में बार-बार सिखाया जाता है कि अपनी अज्ञानता, अनिश्चय और उलझन को कभी स्वीकार नहीं करें। सबसे अहम बात यह है कि उनमें कूट-कूट कर यह भरा जाता है कि छात्रों से एक पेशेवर दूरी रखें और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और भावनाओं के बारे में कभी खुलकर बात नहीं करें। लेकिन यही वे बातें हैं जिनमें बच्चों की सबसे ज्यादा जिज्ञासा होती है, क्योंकि इसी से ये महसूस कर सकते हैं कि बड़ा होना क्या होता है। ''बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती''- वाक्य से. तात्पर्य है--
बच्चों की दुनिया में कोई लड़ाई नहीं होती। उनके लिए दुनिया है और वे इस दुनिया में आना चाहते हैं। बच्चों को यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि यह दुनिया इतनी बेकार है, यहाँ करने के काबिल कुछ भी नहीं है और इससे बचकर कितना दूर भागा जा सकता है। संभवतः सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि न्यू लिटिल स्कूल के शिक्षक खुले और सच्चे हैं अर्थात, ये लोग उन सभी विषयों पर बात करने के लिए तत्पर रहते हैं जिन पर बच्चे बात करना चाहते हैं। वे अपने सच्चे विचार प्रकट करते हैं और कोई बात अगर वे नहीं जानते तो स्वीकार कर लेते हैं। ज्यादातर शिक्षकों के साथ ऐसा नहीं है। सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि 90 प्रतिशत अमेरिकी शिक्षक विवादास्पद विषयों के बारे में स्कूल में बात करने में विश्वास नहीं करते तथा बच्चों को भी इन विषयों के बारे में बात नहीं करने देते। हालाँकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि बच्चों की इन विषयों में सबसे अधिक रुचि होती है। इसलिए पारंपरिक स्कूलों में बच्चे ज्यादा बात नहीं कर सकते और ईमानदारी से नहीं कर सकते। इसके अलावा शिक्षकों को प्रशिक्षण में बार-बार सिखाया जाता है कि अपनी अज्ञानता, अनिश्चय और उलझन को कभी स्वीकार नहीं करें। सबसे अहम बात यह है कि उनमें कूट-कूट कर यह भरा जाता है कि छात्रों से एक पेशेवर दूरी रखें और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और भावनाओं के बारे में कभी खुलकर बात नहीं करें। लेकिन यही वे बातें हैं जिनमें बच्चों की सबसे ज्यादा जिज्ञासा होती है, क्योंकि इसी से ये महसूस कर सकते हैं कि बड़ा होना क्या होता है। पारंपरिक स्कूलों के बारे में कौन सा कथन सही नहीं है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज से सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी-सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष का प्याला पीना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर से ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूंज रहा है-हे प्रभु, हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रदायिक विष को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गांधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते फिरे अन्त में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमरीका में हुई है वहां के काले लोगों को उनके रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचित स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमरीका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमरीकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमरीकनों को मिलता है, लेकिन उसका भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इंसाफ मांगने वालों को अन्त इसी प्रकार होता रहेगा? क्या आपसी विद्वेष को समाप्त करने की सम्भावना इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं होगी? 'आर्तनाद' का सही अर्थ क्या है।
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज से सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी-सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष का प्याला पीना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर से ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूंज रहा है-हे प्रभु, हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रदायिक विष को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गांधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते फिरे अन्त में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमरीका में हुई है वहां के काले लोगों को उनके रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचित स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमरीका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमरीकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमरीकनों को मिलता है, लेकिन उसका भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इंसाफ मांगने वालों को अन्त इसी प्रकार होता रहेगा? क्या आपसी विद्वेष को समाप्त करने की सम्भावना इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं होगी? ग्रीस देश के दार्शनिक का क्या नाम थाः
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज से सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी-सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष का प्याला पीना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर से ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूंज रहा है-हे प्रभु, हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रदायिक विष को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गांधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते फिरे अन्त में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमरीका में हुई है वहां के काले लोगों को उनके रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचित स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमरीका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमरीकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमरीकनों को मिलता है, लेकिन उसका भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इंसाफ मांगने वालों को अन्त इसी प्रकार होता रहेगा? क्या आपसी विद्वेष को समाप्त करने की सम्भावना इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं होगी? विष का प्याला सुकरात को क्यों पीना पड़ा
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज से सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी-सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष का प्याला पीना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा, इसी प्रकार तत्कालीन शासन-सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर से ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूंज रहा है-हे प्रभु, हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रदायिक विष को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गांधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान घूमते फिरे अन्त में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमरीका में हुई है वहां के काले लोगों को उनके रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचित स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमरीका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमरीकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमरीकनों को मिलता है, लेकिन उसका भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इंसाफ मांगने वालों को अन्त इसी प्रकार होता रहेगा? क्या आपसी विद्वेष को समाप्त करने की सम्भावना इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं होगी? धार्मिक एवं सामाजिक दुराचारों के विरुद्ध आवाज उठाने पर किसे सूली पर चढ़ना पड़ाः
जहाँ तक मैं समझता हूँ, मेरी आत्मिक शक्तियों के विकास में "बार्सीलोना और उसके निवासियों का सबसे सुंदर चित्रण भी सहायक , नहीं हो सकता था। स्योम्का और फेद्का को पीटर्सबर्ग के जलमार्गों को जानने की क्या जरूरत है, अगर जैसी कि संभावना है, वे वहां कभी नहीं जा पाएँगे अगर स्योम्का का वहां कभी जाना होगा भी, तो उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि उसने यह स्कूल में पढ़ा था या नहीं, क्योंकि तब इन जलमार्गों को वह व्यवहार में जान ही जाएगा और अच्छी तरह जान जाएगा। मैं नहीं समझ सकता कि उसकी आत्मिक शक्तियों के विकास में इस बात की जानकारी से कोई मदद मिल सकती है कि वोल्गा में सन से लदे जहाज नीचे की ओर जाते हैं और अलकतरे से लदे जहाज ऊपर की ओर, कि दुबोब्का नाम का एक बंदरगाह है, कि सामोयेद लोग बारहसिंगा गाड़ियों पर सफर करते हैं, वगैरह-वगैरह। निम्नलिखित में से कौन-सा 'चित्रण' के लिए उपयुक्त विशेषण नहीं है?
जहाँ तक मैं समझता हूँ, मेरी आत्मिक शक्तियों के विकास में "बार्सीलोना और उसके निवासियों का सबसे सुंदर चित्रण भी सहायक , नहीं हो सकता था। स्योम्का और फेद्का को पीटर्सबर्ग के जलमार्गों को जानने की क्या जरूरत है, अगर जैसी कि संभावना है, वे वहां कभी नहीं जा पाएँगे अगर स्योम्का का वहां कभी जाना होगा भी, तो उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि उसने यह स्कूल में पढ़ा था या नहीं, क्योंकि तब इन जलमार्गों को वह व्यवहार में जान ही जाएगा और अच्छी तरह जान जाएगा। मैं नहीं समझ सकता कि उसकी आत्मिक शक्तियों के विकास में इस बात की जानकारी से कोई मदद मिल सकती है कि वोल्गा में सन से लदे जहाज नीचे की ओर जाते हैं और अलकतरे से लदे जहाज ऊपर की ओर, कि दुबोब्का नाम का एक बंदरगाह है, कि सामोयेद लोग बारहसिंगा गाड़ियों पर सफर करते हैं, वगैरह-वगैरह। बच्चे बहुत कुछ स्वतः ही तभी सीख जाते हैं जब
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जहाँ तक मैं समझता हूँ, मेरी आत्मिक शक्तियों के विकास में बार्सीलोना और उसके निवासियों का सबसे सुंदर चित्रण भी सहायक नहीं हो सकता था। स्योम्का और फेदका को पीटर्सबर्ग के जलमार्गों को जानने की क्या जरूरत है, अगर जैसी कि संभावना है, वे वहां कभी नहीं जा पाँगे? अगर स्योम्का का वहां कभी जाना होगा भी, तो उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि उसने यह स्कूल में पढ़ा था या नहीं, क्योंकि तब इन जलमार्गों को वह व्यवहार में जान ही जाएगा और अच्छी तरह जान जाएगा। मैं नहीं समझ सकता कि उसकी आत्मिक शक्तियों के विकास में इस बात की जानकारी से कोई मदद मिल सकती है कि वोल्गा में सन से लदे जहाज नीचे की ओर जाते हैं और अलकतरे से लदे जहाज ऊपर की ओर, कि दुबोका नाम का एक बंदरगाह है, कि सामोयेद लोग बारहसिंगा गाड़ियों पर सफर करते हैं, वगैरह-वगैरह। स्योम्का और फेद्का हैं
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