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ब्लास्टोपोर है | 12 | मानव प्रजनन | जीव विज्ञान | दिनेश प्रकाशन | संशय

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The given pie chart shows the marks obtained in an examination by a student (in degrees). Observe the pie chart and answer the question that follows: दिया गया पाई चार्ट एक छात्र द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों (डिग्री में) को दर्शाता है। पाई चार्ट का निरीक्षण करें और निम्न प्रश्न का उत्तर दें: If total marks are 720, then the marks obtained in Chemistry, Biology and Maths together is what percentage of the total marks? यदि कुल अंक 720 हैं, तो रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित में प्राप्त अंक कुल अंकों का कितना प्रतिशत है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। विज्ञान ने मनुष्य को कहाँ पहुँचाया?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। विज्ञान के कारण मौसम में क्या बदलाव आया?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। किसके सहारे मानव ने धरती को रौंद डाला?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। वार्तालाप किन दोनों के बीच हुआ?