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विकृति किसे कहते हैं ? इसका मात्रक तथा विमीय सूत्र लिखिए। | 11 | ठोसों के यांत्रिक गुण | PHYSICS...

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कोण|प्रश्न|त्रिकोणमितीय अनुपात|महत्वपूर्ण सूत्र तथा सूत्र|कुछ मानक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात|चार चतुर्थांश तथा ASTC नियम|कुछ महत्वपूर्ण सूत्र|द्विघात समीकरण एवं इसका हल|OMR|Summary

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The parallel sides of a trapezium are 20 cm and 10 cm and its non-parallel sides are equal to each other. If its area is 180 cm^2 , then what is the length (in cm) of each non parallel side? / एक समलंब चतुर्भुज की समानांतर भुजाएं 20 सेमी तथा 10 सेमी की हैं तथा इसकी गैर-समानांतर भुजाएं एक दूसरे के बराबर हैं | यदि इसका क्षेत्रफल 180 वर्ग सेमी है, तो प्रत्येक गैर-समानांतर भुजा की लंबाई ज्ञात करें |

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये सौन्दर्य की परख अनेक प्रकार से की जाती है। बाह्य सौन्दर्य की परख समझना तथा उसकी अभिव्यक्ति करना सरल है। जय रूप के साथ चरत्रि का भी स्पर्श हो जाता है तब उसमें रसास्वादन की अनुभूति भी होती है। एक वस्तु केवल इन्द्रियों को सन्तुष्ट करती है, जबकि मनोरम वस्तु चित को भी आनन्दित करती है। इस दृष्टि से कवि जयदेव का वसन्त चित्रण सुन्दर है तथा कालिदास का प्रकृति वर्णन मनोहर है, क्योंकि उसमें चरित्र की प्रधानता है। 'सुन्दर' शब्द संकीर्ण है, जबकि 'मनोहर' व्यापक तथा विस्तृत है। साहित्य में साधारण वस्तु भी विशेष प्रतीत होती है तथा उसे मनोहर कहते हैं। कालिदास के प्रकृति वर्णन का आधार है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये सौन्दर्य की परख अनेक प्रकार से की जाती है। बाह्य सौन्दर्य की परख समझना तथा उसकी अभिव्यक्ति करना सरल है। जय रूप के साथ चरत्रि का भी स्पर्श हो जाता है तब उसमें रसास्वादन की अनुभूति भी होती है। एक वस्तु केवल इन्द्रियों को सन्तुष्ट करती है, जबकि मनोरम वस्तु चित को भी आनन्दित करती है। इस दृष्टि से कवि जयदेव का वसन्त चित्रण सुन्दर है तथा कालिदास का प्रकृति वर्णन मनोहर है, क्योंकि उसमें चरित्र की प्रधानता है। 'सुन्दर' शब्द संकीर्ण है, जबकि 'मनोहर' व्यापक तथा विस्तृत है। साहित्य में साधारण वस्तु भी विशेष प्रतीत होती है तथा उसे मनोहर कहते हैं। सौन्दर्य की परख की जाती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये सौन्दर्य की परख अनेक प्रकार से की जाती है। बाह्य सौन्दर्य की परख समझना तथा उसकी अभिव्यक्ति करना सरल है। जय रूप के साथ चरित्र का भी स्पर्श हो जाता है तब उसमें रसास्वादन की अनुभूति भी होती है। एक वस्तु केवल इन्द्रियों को सन्तुष्ट करती है, जबकि मनोरम वस्तु चित को भी आनन्दित करती है। इस दृष्टि से कवि जयदेव का वसन्त चित्रण सुन्दर है तथा कालिदास का प्रकृति वर्णन मनोहर है, क्योंकि उसमें चरित्र की प्रधानता है। 'सुन्दर' शब्द संकीर्ण है, जबकि 'मनोहर' व्यापक तथा विस्तृत है। साहित्य में साधारण वस्तु भी विशेष प्रतीत होती है तथा उसे मनोहर कहते हैं। रसास्वादन की अनुभूति का बोध होता है