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टीकों का इतिहास | टीकाकरण और प्रतिरक्षण | चेचक | एनसीईआरटी | विज्ञान | संशय

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। विज्ञान ने मनुष्य को कहाँ पहुँचाया?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। विज्ञान के कारण मौसम में क्या बदलाव आया?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 2 एक दिवस प्रेम, विज्ञान ने आपस में बातें की। ऊँचा कर शीश और तान निज वक्ष तनिक विज्ञान बोला यो सुन रे ओ प्रेम वायु में उड़ाया गहरे पानी पठाया ऊँचे शिखरों पर चढ़ाया मैंने ही मानव को। मैंने ही मोड़ डाला अनगिन सरि-धारों को, मरुथल-पहाड़ों को मेरा सहारा ले मानव पदों ने चप्पा-चप्पा भी रौंद डाला। सुन रे, ओ प्रेम मैने मौसम बदल डाला। ग्रीष्म में शीत और शीत में ग्रीष्म कर पहुँचाया कितना है सुख मैंने मानव को। उपरोक्त पद्यांश का शीर्षक होगा