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"एक बहुभुज बनाएं और उसके आंतरिक भाग...

"एक बहुभुज बनाएं और उसके आंतरिक भाग को छायांकित करें। यदि कोई हो, तो इसके विकर्ण भी बनाइए।"

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If each interior angle of a regular polygon is (128 4/7)^@ , then what is the sum of the number of its diagonal and the number of its sides? /यदि किसी सम बहुभुज का प्रत्येक आतंरिक कोण (128 4/7)^@ है, तो इसके विकर्णों की संख्या और इसकी भुजाओं की संख्या का योग ज्ञात करें |

Ravi sells a chair to Mohan at a profit 10% and Mohan sells it to Govind at profit 20%. If Govind pays Rs.1320 for it. Then the cost price for Ravi is: रवि मोहन को 10% के लाभ पर एक कुर्सी बेचता है और मोहन उसे गोविंद को 20% के लाभ पर बेचता है। यदि गोविंद इसके लिए रु 1,320 का भुगतान करता है तो रवि के लिए लागत मूल्य है:

A man spends a part of his monthly income and saves the rest. The ratio of his expenditure to the saving is 61: 6. If his monthly income is t 8710, the amount of his monthly savings is/एक व्यक्ति अपनी मासिक आय का कुछ भाग खर्च करता है और बाकी की बचत करता है। उसके व्यय और बचत का अनुपात 61:6 है। यदि उसकी मासिक आय ₹ 8710 हो, तो उसकी मासिक बचत की राशि कितनी है ?

The diameter of a right circular cylinder is decreased to one third of its initial value. If the volume of the cylinder remains the same, then the height becomes how many times of the initial height ? एक लम्ब वृत्तीय बेलन के व्यास को इसके आरंभिक मान से एक तिहाई कम कर दिया जाता है | यदि बेलन का आयतन समान बना रहता है, तो इसकी ऊंचाई अपने आरंभिक मान से कितना गुना हो जाएगी ?

A number is divided into three parts such that three times the first part, six times the second part and eight times the third part are equal. If the first part is Rs. 1600, then what is the third part ? एक संख्या को तीन भागों में इस प्रकार विभाजित किया जाता है की पहला भाग का तीन गुना, दूसरे भाग का छह गुना और तीसरे भाग का आठ गुना बराबर है | यदि पहला भाग Rs 1600 है, तो तीसरी भाग कितना है?

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक से हो जाएंगे यदि हम