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काँच तथा हीरा के अपवर्तनांक क्रमश : 1.5 ...

काँच तथा हीरा के अपवर्तनांक क्रमश : 1.5 तथा 2.4 हैं | (i)काँच तथा हीरा में प्रकाश की चाल का मान ...

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In a wallet, there are notes of the denominations of ₹ 10 and ₹ 50. The total notes is 12. The number of ₹ 10 and ₹ 50 notes are in the ratio of 1:2. Total money in the wallet is: एक वॉलेट में, 10 रुपये तथा 50 रुपये के नोट हैं | कुल नोट 12 हैं | 10 रुपये तथा 50 रुपये के नोटों की संख्या का अनुपात 1 :2 है | इस वॉलेट में कुल कितनी राशि है ?

What is the ratio of the third proportional to 0.4 and 0.8, to the mean proportional between 13.5 and 0.24 ? 0.4 तथा 0.8 के तीसरे आनुपातिक और 13.5 तथा 0.24 के बीच माध्य समानुपाती में क्या अनुपात होगा ?

The radii of a right circular cone and a right circular cylinder are in the ratio 2:3. If the ratio of heights of the cone and the cylinder is 3:4, then what is the ratio of the volumes of the cone and the cylinder? एक लम्ब वृत्तीय शंकु तथा लम्ब वृत्तीय बेलन की त्रिज्याएँ 2 : 3 के अनुपात में हैं | यदि शंकु तथा बेलन की ऊंचाई में 3 : 4 का अनुपात है, तो शंकु तथा बेलन के आयतन में क्या अनुपात होगा ?

The monthly incomes of Mohit and Prakash are in the ratio 2 : 3. Their monthly expenditures are in the ratio 3 : 5. If each saves Rs5000 per month, then what is the sum of monthly incomes of Mohit and Prakash? मोहित तथा प्रकाश की मासिक आय 2 : 3 के अनुपात में है | उनके मासिक व्यय 3 : 5 के अनुपात में हैं | यदि उनमें से प्रत्येक प्रतिमाह 5000 रुपये की बचत करता है, तो मोहित तथा प्रकाश की मासिक आय का योग ज्ञात करें |

The diagonals of a rhombus are 12 cm and 16 cm respectively.The length of one side is- एक समचतुर्भुज के विकण क्रमश: 12 सेमी तथा 16 सेमी हैं। सकी एक भुजा की लम्बाई कितनी होगी?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। अरब के कवि मरुस्थल में बहतेहुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि कहाँ के कवि मरुस्थल में भी सौन्दर्य का अनुभव कर लेते है?

गति की दर का मापन |दिशा के साथ चाल |एकसमान तथा आसमान वेग |वेग में परिवर्तन की दर |Summary

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। हुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि भारतीय कवि प्रकृति के संश्लिष्ट तथा सजीव चित्र जितनी मार्मिकता, उत्तमता तथा अधिकता से अंकित कर सकते हैं तथा उपमा-उत्प्रेक्षाओं के लिए जैसी सुन्दर वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, वैसा रूखे-सूखे देश के निवासी कवि नहीं कर सकते। यह भारत-भूमि की ही विशेषता है कि यहाँ के कवियों का प्राकृतिक-वर्णन तथा तत्संभव सौन्दर्य-ज्ञान उच्च कोटि का होता है। प्रकृति के रम्य रूपों में तल्लीनता की जो अनुभूति होती है उसका उपयोग कविगण कभी-कभी रहस्यमयी भावनाओं के संचार में भी करते हैं। यह अखंड भूमण्डल तथा असंख्य ग्रह, उपग्रह, रवि-शशि अथवा जल, वायु, अग्नि, आकाश कितने रहस्यमय तथा अज्ञेय हैं? इनके सृष्टि-संचालन आदि के सम्बन्ध में दार्शनिकों अथवा वैज्ञानिकों ने इन तत्वों का निरूपण किया है। भारतीय कवियों को चिरकाल से किससे अनुराग रहा है?