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महा मैंराथन (अभी तक कुछ नहीं पढ़ा तो बस य...

महा मैंराथन (अभी तक कुछ नहीं पढ़ा तो बस ये करलो)

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UP Board Exam 2024 | अभी तक कुछ नहीं पढ़ा? आखिरी 5 दिन पढ़कर गणित और विज्ञान में लाये 100 में 100

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 25 अगर किसी दिन बैल तुम्हारा सोच-समझ अड़ जाए, चले नहीं, बस, खड़ा खड़ा गर्दन को खूब हिलाए । घण्टी टुनटुन खूब बजेगी, तुम न पास आओगे, मगर बूँद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे? मालिक थोड़ा हँसा और बोला कि पढ़क्कू जाओ, सीखा है यह ज्ञान जहाँ पर, वहीं इसे फैलाओ। यहाँ सभी कुछ ठीक-ठाक है, यह केवल माया है, बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है। " " रामधारी सिंह दिनकर मालिक पढ़क्कू की किस बात पर हँसा?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 25 अगर किसी दिन बैल तुम्हारा सोच-समझ अड़ जाए, चले नहीं, बस, खड़ा खड़ा गर्दन को खूब हिलाए । घण्टी टुनटुन खूब बजेगी, तुम न पास आओगे, मगर बूँद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे? मालिक थोड़ा हँसा और बोला कि पढ़क्कू जाओ, सीखा है यह ज्ञान जहाँ पर, वहीं इसे फैलाओ। यहाँ सभी कुछ ठीक-ठाक है, यह केवल माया है, बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है। " " रामधारी सिंह दिनकर आपके अनुसार इस कविता का नायक कौन है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 25 अगर किसी दिन बैल तुम्हारा सोच-समझ अड़ जाए, चले नहीं, बस, खड़ा खड़ा गर्दन को खूब हिलाए । घण्टी टुनटुन खूब बजेगी, तुम न पास आओगे, मगर बूँद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे? मालिक थोड़ा हँसा और बोला कि पढ़क्कू जाओ, सीखा है यह ज्ञान जहाँ पर, वहीं इसे फैलाओ। यहाँ सभी कुछ ठीक-ठाक है, यह केवल माया है, बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है। " " रामधारी सिंह दिनकर शब्द 'साँझ' का समानार्थक शब्द है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 25 अगर किसी दिन बैल तुम्हारा सोच-समझ अड़ जाए, चले नहीं, बस, खड़ा खड़ा गर्दन को खूब हिलाए । घण्टी टुनटुन खूब बजेगी, तुम न पास आओगे, मगर बूँद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे? मालिक थोड़ा हँसा और बोला कि पढ़क्कू जाओ, सीखा है यह ज्ञान जहाँ पर, वहीं इसे फैलाओ। यहाँ सभी कुछ ठीक-ठाक है, यह केवल माया है, बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है। " " रामधारी सिंह दिनकर 'माया' शब्द प्रयुक्त है