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कृत्रिम संकरीकरण|पराग स्त्रीकेसर संकर्षण...

कृत्रिम संकरीकरण|पराग स्त्रीकेसर संकर्षण|पराग नलिका का बीजाण्ड मे प्रवेश|द्विनिषेचन और उसका महत्व |भ्रूणपोष |OMR

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कृत्रिम संकरीकरण|पराग - स्त्रीकेसर संकर्षण |पराग-नलिका का बीजाण्ड में प्रवेश |OMR

पराग- स्त्रीकेसर संकर्षण|द्विनिषेचन|भ्रूणपोष|OMR

पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण|अण्डय में परागणलिंका का प्रवेश|कृत्रिम संकरीकरण|दोहरानिषेचन|OMR|Summary

पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण|अण्डय में परागणलिंका का प्रवेश|कृत्रिम संकरीकरण|दोहरानिषेचन|OMR|Summary

पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण|अण्डय में परागणलिंका का प्रवेश|कृत्रिम संकरीकरण|दोहरानिषेचन|OMR|Summary

पुष्पी पादप में लैंगिक जनन-पुष्प संरचना |पराग़कण के नुक़सान और फ़ायदे |स्त्रीकेसर |परागण और उसके प्रकार ,प्रकार के लाभ हानि सहित |कृत्रिम संकरीकरण |पराग़ -स्त्रीकेसर संकर्षण |भ्रूणपोष |बीज और (फल के प्रकार)

पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे के विकास का एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाता, अपितु कृत्रिम खंडों मे बँट जाता है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका उध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने सहपाठियों से अधिक दिलचस्पी रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत चसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, जब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा। श्री अरविंद आश्रम के शिक्षा केंद्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्वनिर्धारित और स्थिर नहीं रहता, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और मामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने की छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छुट नहीं दी जाती। होता प्रायः यह हैं कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिलकुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ बह पिछली कक्षा में जान चूका था। विशेषतौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है ' बे ' उपसर्ग का प्रयोग किस शब्द मे नहीं किया जा सकता?

पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे के विकास का एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाता, अपितु कृत्रिम खंडों मे बँट जाता है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका उध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने सहपाठियों से अधिक दिलचस्पी रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत चसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, जब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा। श्री अरविंद आश्रम के शिक्षा केंद्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्वनिर्धारित और स्थिर नहीं रहता, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और मामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने की छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छुट नहीं दी जाती। होता प्रायः यह हैं कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिलकुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ बह पिछली कक्षा में जान चूका था। विशेषतौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है यह संभव है कि अलग-अलग बच्चे अलग-अलग विष्यों मे _______रखते हों।

पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे के विकास का एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाता, अपितु कृत्रिम खंडों मे बँट जाता है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका उध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने सहपाठियों से अधिक दिलचस्पी रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत चसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, जब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा। श्री अरविंद आश्रम के शिक्षा केंद्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्वनिर्धारित और स्थिर नहीं रहता, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और मामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने की छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छुट नहीं दी जाती। होता प्रायः यह हैं कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिलकुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ बह पिछली कक्षा में जान चूका था। विशेषतौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है पाठ्यक्रम का निर्माण करते समय बच्चों की ......... का ध्यान रखा जाना चाहिए

पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे के विकास का एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाता, अपितु कृत्रिम खंडों मे बँट जाता है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका उध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने सहपाठियों से अधिक दिलचस्पी रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत चसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, जब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा। श्री अरविंद आश्रम के शिक्षा केंद्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्वनिर्धारित और स्थिर नहीं रहता, बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और मामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने की छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छुट नहीं दी जाती। होता प्रायः यह हैं कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिलकुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ बह पिछली कक्षा में जान चूका था। विशेषतौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है पाठ्यक्रम को पाठ्यपुस्तकों का पर्याय _______