मृदा अपरदन|मृदा अपरदन के कारण|वायु अपरदन|पवन अपरदन से बचाव|जल अपरदन|मानवीय कारण|मृदा अपरदन से हानियाँ|Revision
मृदा अपरदन|मृदा अपरदन के कारण|वायु अपरदन|पवन अपरदन से बचाव|जल अपरदन|मानवीय कारण|मृदा अपरदन से हानियाँ|Revision
Similar Questions
Explore conceptually related problems
दोहरान |Quiz 1 |मृदा अपरदन |मृदा अपरदन के कारण |मृदा प्रदूषण |मृदा संरक्षण |NCERT Exercise|सारांश
भू संसाधन|भू उपयोग के प्रकार|भू निम्नीकरण|मिटटी के प्रकार|मृदा अपरदन|OMR
Revision|जल: एक अद्भुत द्रव |जल प्रदूषण |जल प्रदूषण के स्त्रोत |जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव |जल प्रदूषण के नियंत्रण के साधन |मृदा |मिट्टी का निर्माण |मृदा प्रदूषण के स्त्रोत |मृदा प्रदूषण के प्रभाव |मृदा अपरदन |OMR|महत्वपूर्ण बिन्दु
भू संसाधन|भू उपयोग के प्रकार|भू निम्नीकरण|मिट्टी के प्रकार|मृदा अपरदन|OMR|Questions & Quiz|Summary
भू संसाधन|भू उपयोग के प्रकार|भू निम्नीकरण|मिट्टी के प्रकार|मृदा अपरदन|OMR|Questions & Quiz|Summary
Introduction|औद्योगीकरण का युग|पूर्व औद्योगीकरण|आदि औद्योगीकरण|व्यापारियों का गाँवो पर ध्यान देने का कारण|ब्रिटेन में आदि औद्योगीकरण के लक्षण|कारखानों की शुरुआत|कारखानों से लाभ|One Minute Revision
Revision|मृदा|सूर्य|मृदा की उपयोगिता|भूमि/ मृदा प्रदूषण|मृदा अपरदन|OMR
संसाधन |संसाधनो के प्रकार |सममय्याप्त के आधार पर |स्वामित्व के आधार पर |विकास के स्तर के आधार पर |संसाधनो का विकास |सतत पोषणीय विकास |संसाधन नियोजन |औपनिवेशिक इतिहास |संसाधनो का संरक्षण |भू संसाधन |भू उपयोग के प्रकार |भू निमनिकरण |मिट्टी के प्रकार|मृदा अपरदन
हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता था। अहिंसा की भावना सर्वोपरि थी। आज पूरा जीवन-दर्शन ही बदल गया है। सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य ध्येय हो गया है. भले ही धन-उपार्जन के तरीके गलत ही क्यों न हों। इन सबका असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा है। समाज का वातावरण दूषित हो गया है। इन सबके कारण मानसिक और शारीरिक तनाव-खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैं। आज आदमी धन के पोछे अंधाधुंध दौड़ रहा है। पाँच रूपये मिलने पर दस, दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल है। इस दौड़ का कोई अंत नहीं। धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गए हैं। व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने-पराए के भेद-भाव को भूल गया। उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए समय नहीं। धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा है। भाई-भाई के खून का प्यासा है। धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही है। इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह-जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी-डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करमे होंगे। हमारे मानवीय संबंध पीछे छूटने का कारण है