राष्ट्रीय विकास की धारणाएँ|राष्ट्रीय आय|विश्व बैंक|विकसित देश|अल्प विकसित देश|विकासशील देश|शरीर द्रव्यमान सूचकांक|उदाहरण प्रश्न|जन्म के समय संभावित आयु|आधारभूत संरचना|OMR
राष्ट्रीय विकास की धारणाएँ|राष्ट्रीय आय|विश्व बैंक|विकसित देश|अल्प विकसित देश|विकासशील देश|शरीर द्रव्यमान सूचकांक|उदाहरण प्रश्न|जन्म के समय संभावित आयु|आधारभूत संरचना|OMR
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जन्म के समय संभावित आयु|साक्षरता दर|आधारभूत संरचना|विकास के जरूरी लक्ष्यों का मिश्रण|OMR
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। 'राष्ट्रीय' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। ''लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते है.....' वाक्य में रेखांकित शब्द किस अर्थ की ओर संकेत करता है?
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। लेखक के अनुसार हम किनके प्रति अन्याय करते हैं?
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। लेखक के अनुसार हम किनके नाम पर पैसा इकट्ठा करते हैं?
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। किस शब्द में स्वर रहित पंचम वर्ण के स्थान पर अनुस्वार (.) का प्रयोग किया जा सकता है?
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि
राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय र अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखे, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देशात प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी को कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्यास-से-हम बच ही नहीं है सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी , के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। जितना भी जोर से ul("चीखें") ,' वाक्य में क्रिया है
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। राजनीतिक बहसों को गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखें, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देश प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी के कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा उनके प्रति अन्याय से हम बच ही नहीं सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा वो अंतत: हमारी पार्टी के ही लोगों के पास पहुंचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानये प्रतिशत के बीच की दूरी समुंदर से भी अधिक चौड़ी है। राष्ट्रीय' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?