Home
Class 11
BIOLOGY
तना|तनों का स्वभाव|तने का रूपांतरण|भूमिग...

तना|तनों का स्वभाव|तने का रूपांतरण|भूमिगत रूपांतरण|वायवीय रूपांतरण|पर्णाभ पर्व|स्तम्भीय तंतु या स्तम्भ प्रटान|तने या स्तम्भ के कार्य

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

तना |तने के रूपांतरण |भूमिगत तने |अर्द्धवायवीय तने |वायवीय तने |OMR

तने के रूपांतरण |भूमिगत तने |अर्द्धवायवीय तने |वायवीय तने |OMR

तने के रूपांतरण |भूमिगत तने |अर्द्धवायवीय तने |वायवीय तने |OMR

तना|तने के रूपांतरण|OMR|Summary

OMR|तना |पत्ती एवं उसके भाग |तने का कार्य |दोहरान

आव्यूह पर प्रारंभिक संक्रिया (आव्यूह रूपांतरण)|व्युत्क्रमणीय आव्यूह|व्युत्क्रमणीय आव्यूह के गुणधर्म|प्रारम्भिक संक्रियाओं द्वारा आव्यूह का व्युत्क्रम|उदाहरण|सारांश

आव्यूह पर प्रारंभिक संक्रिया (आव्यूह रूपांतरण)|व्युत्क्रमणीय आव्यूह|व्युत्क्रमणीय आव्यूह के गुणधर्म|प्रारम्भिक संक्रियाओं द्वारा आव्यूह का व्युत्क्रम|उदाहरण|सारांश

आव्यूह पर प्रारंभिक संक्रिया (आव्यूह रूपांतरण)|व्युत्क्रमणीय आव्यूह|व्युत्क्रमणीय आव्यूह के गुणधर्म|प्रारम्भिक संक्रियाओं द्वारा आव्यूह का व्युत्क्रम|उदाहरण|सारांश

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्य में क्रोधी स्वभाव का आंकलन किया है