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गद्यांश : क्या लिखूँ , ईर्ष्या तू न गई म...

गद्यांश : क्या लिखूँ , ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से, पानी में चन्दा और चाँद पर आदमी (Full Explaination)

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त पार्थ की क्या प्रतिज्ञा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त 'वृथा' शब्द का समानार्थक है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 23 उपयुक्त उस बल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है। अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मै, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर मही सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं में ही अनल में जल मरूँ। " " मैथिलीशरण गुप्त 'खल' शब्द का विपरीतार्थक है।