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PHYSICS
ध्रुवण|परावर्तन से ध्रुवण|By-polaroid|By...

ध्रुवण|परावर्तन से ध्रुवण|By-polaroid|By Scattering|Thin-Film-int|परावर्तित किरणों का व्यतिकरण

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Recap |प्रकाश का तरंग गति सिद्धांत |तरंगाग्र की विशेषताएं |हाइगन सिद्धांत के उपयोग द्वारा परावर्तन एवं अपवर्तन के नियमों की उत्पत्ति |अध्यारोपण का सिद्धांत |व्यतिकरण |स्थाई व्यतिकरण की शर्त |संपोषी व्यतिकरण |विनाशी व्यतिकरण |यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग

Recap|ध्रुवण |प्रकाश के ध्रुवण का प्रयोगिक प्रदर्शन |ब्रूस्टर का नियम |प्रश्न

प्रकाश का परावर्तन|परावर्तन के नियम|बिम्ब और प्रतिबिम्ब |समतल दर्पण से परावर्तन|OMR|Summary

प्रकाश का परावर्तन |परावर्तन के नियम |बिंब और प्रतिबिंब |समतल दर्पण से परावर्तन |गोलीय दर्पण |अपवर्तन |OMR

आभासी गहराई तथा अभिलम्ब विस्थापन |पूर्ण आंतरिक परावर्तन |वक्रिय पृष्ठों से अपवर्तन |लेंस |प्रतिबिंब का निर्माण

उप-सहसंयोजक बंध|उप-सहसंयोजक योगिको के गुण|ध्रुवण का फाजन्स का नियम|आयनिक बंध|ध्रुवण का फाजन्स का नियम|निम्न में बढ़ता हुआ सहसंयोजक गुण|अनुनाद|OMR|Summary

संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक. देश व जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्रायः सुसंस्कृत और सभ्य देशों में एक सीमा तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है, राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से संपृक्त बनाती है, रीति-नीति की सम्पदा को विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिले अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति शंकालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है। वह किसी राष्ट्रप्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्त्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे, किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोक प्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवन शक्ति मिले, किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण अज्ञान का ही पर्याय है। 'दुर्बलता' का सन्धि-विच्छेद है