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4‌ विद्यार्थियों को 5 पुरस्कार दिये जाते...

4‌ विद्यार्थियों को 5 पुरस्कार दिये जाते हैं बताओं ये पुरस्कार कितनी तरह से दिए जा सकते हैं जबकि-
(i) प्रत्येक विद्यार्थी पांचों पुरस्कार भी पा सकता है,
(ii) कोई भी विद्यार्थी सभी पुरस्कारों को लेने योग्य नहीं है।

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जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?

कमज़ोर विचारक तत्काल उत्तर की ओर दौड़ता है। पर सोचने वाले बच्चे .. समय लेते हैं। सवाल पर विचार करते हैं। क्या यह अन्तर केवल सोचने के कौशल के होने या न होने के कारण है? एक ऐसा कौशल जो केवल एक तकनीक है और जिसे, अगर भाग्य ने साथ दिया तो, हम बुद्धि से बच्चों कों सिखा सकते हैं। क्या बच्चों को इस कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं? मुझे भय है कि ऐसा नहीं है। अच्छा विचारक सोचने में समय इसलिए लगा सकता है, क्योकि वह अनिश्चय को सह सकता है। वह इस बात को भी झेल सकता है कि वह कोई चीज नहीं जानता। पर कमजोर विचारक को कुछ न जानने की कल्पना ही असहनीय लगती है। क्या इस पूरे विश्लेषण से हम यह नहीं पाते कि असल में इन बच्चों में 'गलत' होने का भय बैठा होता है? बेशक यही भय है जो मॉनिका जैसे बच्चों पर भयानक दबाव डालता है। ठीक ऐसे ही दबाव हैल भी महसूस करता है। शायद मैं भी। मॉनिका अकेली नहीं है जो सही होना चाहती है और गलत होने से डरती है। पर यहाँ शायद एक दूसरी असुरक्षा की भावना काम करती होती है। यह असुरक्षा की भावना पैदा होती है सवाल के लिए कोई भी जवाब नहीं होने से। . "शायद मैं भी।' वाक्य है

कमज़ोर विचारक तत्काल उत्तर की ओर दौड़ता है। पर सोचने वाले बच्चे .. समय लेते हैं। सवाल पर विचार करते हैं। क्या यह अन्तर केवल सोचने के कौशल के होने या न होने के कारण है? एक ऐसा कौशल जो केवल एक तकनीक है और जिसे, अगर भाग्य ने साथ दिया तो, हम बुद्धि से बच्चों कों सिखा सकते हैं। क्या बच्चों को इस कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं? मुझे भय है कि ऐसा नहीं है। अच्छा विचारक सोचने में समय इसलिए लगा सकता है, क्योकि वह अनिश्चय को सह सकता है। वह इस बात को भी झेल सकता है कि वह कोई चीज नहीं जानता। पर कमजोर विचारक को कुछ न जानने की कल्पना ही असहनीय लगती है। क्या इस पूरे विश्लेषण से हम यह नहीं पाते कि असल में इन बच्चों में 'गलत' होने का भय बैठा होता है? बेशक यही भय है जो मॉनिका जैसे बच्चों पर भयानक दबाव डालता है। ठीक ऐसे ही दबाव हैल भी महसूस करता है। शायद मैं भी। मॉनिका अकेली नहीं है जो सही होना चाहती है और गलत होने से डरती है। पर यहाँ शायद एक दूसरी असुरक्षा की भावना काम करती होती है। यह असुरक्षा की भावना पैदा होती है सवाल के लिए कोई भी जवाब नहीं होने से। . कमज़ोर को क्या असहनीय लगता है?

कमज़ोर विचारक तत्काल उत्तर की ओर दौड़ता है। पर सोचने वाले बच्चे .. समय लेते हैं। सवाल पर विचार करते हैं। क्या यह अन्तर केवल सोचने के कौशल के होने या न होने के कारण है? एक ऐसा कौशल जो केवल एक तकनीक है और जिसे, अगर भाग्य ने साथ दिया तो, हम बुद्धि से बच्चों कों सिखा सकते हैं। क्या बच्चों को इस कौशल में प्रशिक्षित कर सकते हैं? मुझे भय है कि ऐसा नहीं है। अच्छा विचारक सोचने में समय इसलिए लगा सकता है, क्योकि वह अनिश्चय को सह सकता है। वह इस बात को भी झेल सकता है कि वह कोई चीज नहीं जानता। पर कमजोर विचारक को कुछ न जानने की कल्पना ही असहनीय लगती है। क्या इस पूरे विश्लेषण से हम यह नहीं पाते कि असल में इन बच्चों में 'गलत' होने का भय बैठा होता है? बेशक यही भय है जो मॉनिका जैसे बच्चों पर भयानक दबाव डालता है। ठीक ऐसे ही दबाव हैल भी महसूस करता है। शायद मैं भी। मॉनिका अकेली नहीं है जो सही होना चाहती है और गलत होने से डरती है। पर यहाँ शायद एक दूसरी असुरक्षा की भावना काम करती होती है। यह असुरक्षा की भावना पैदा होती है सवाल के लिए कोई भी जवाब नहीं होने से। . अच्छे विचारक वे हैं जो