एक रेलगाड़ी स्टेशन 'A' से प्रातः 7 बजे चलना प्रारंभ करती है तथा दूसरे स्टेशन 'B' पर 11:00 बजे पहुंच जाती है । दूसरी रेलगाड़ी स्टेशन 'B'से प्रातः 8 बजे चलना प्रारम्भ करके , स्टेशन A पर सुबह 11:30 बजे पहुंच जाती है । बताइये दोनों रेलगाड़ी कितने बजे एक दूसरे पार करेंगी ।
एक रेलगाड़ी स्टेशन 'A' से प्रातः 7 बजे चलना प्रारंभ करती है तथा दूसरे स्टेशन 'B' पर 11:00 बजे पहुंच जाती है । दूसरी रेलगाड़ी स्टेशन 'B'से प्रातः 8 बजे चलना प्रारम्भ करके , स्टेशन A पर सुबह 11:30 बजे पहुंच जाती है । बताइये दोनों रेलगाड़ी कितने बजे एक दूसरे पार करेंगी ।
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The distance between two stations, A and B is 575 km. A train starts from station ‘A’ at 3:00 p.m. and moves towards station ‘B’ at an average speed of 50 km/h. Another train starts from station ‘B’ at 3:30 p.m. and moves towards station ‘A’ at an average speed of 60 km/h. How far from station ‘A’ will the trains meet? दो स्टेशनों A और B के बीच की दूरी 575 किमी है | एक ट्रेन स्टेशन A से 3: 00 p.m में खुलती है तथा स्टेशन B की तरफ 50 किमी/घंटा की औसत चाल से जाती है | एक अन्य ट्रेन स्टेशन B से 3:30 p.m में खुलती है तथा स्टेशन A की तरफ 60 किमी/घंटा की औसत चाल से जाती है | दोनों ट्रेनें स्टेशन A से कितनी दूरी पर मिलेंगी ?
The distance between two stations, A and B is 428 km. A train starts from station ‘A’ at 6:00 a.m. and moves towards station ‘B’ at an average speed of 48km/h . Another train starts from station ‘B’ at 6:20 a.m. and moves towards station ‘A’ at an average speed of 55km/h. At what time will the train meet? दो स्टेशनों -A और B के बीच की दूरी 428 किमी है | एक ट्रेन स्टेशन A से सुबह 6 बजे निकलती है तथा स्टेशन B की और 48 किमी/घंटा की ओऔसत चाल से जाती है | एक अन्य ट्रेन स्टेशन B से सुबह 6 : 20 में चलती है तथा स्टेशन A की ओर 55 किमी/घंटा की चाल से जाती है | ये ट्रेनें किस समय मिलेंगी ?
A train starts from A at 6 AM and reaches B at 11 AM on the same day. Another train starts from B at 8 AM and reaches A at 3 PM on the same day. At what time the two trains will have crossed each other? एक ट्रेन सुबह 6 बजे शुरू होती है और उसी दिन सुबह 11 बजे B पर पहुंचती है। एक अन्य ट्रेन B से सुबह 8 बजे शुरू होती है और उसी दिन दोपहर 3 बजे A पहुंचती है। किस समय पर दोनों ट्रेनें एक-दूसरे को पार कर लेगी ?
X and Y are two stations which are 280 km apart. A train starts at a certain time from X and travels towards Y at 60 km/h. After 2 hours, another train starts from Y and travels towards X at 20 km/h. After how many hours does the train leaving from X meets the train which left from Y? / X और Y दो स्टेशन हैं जो एक दूसरे से 280 किमी टूर हैं। एक ट्रेन स्टेशन X से एक निश्चित समय पर शुरू होती है और 60 किमी / घंटा की गति से स्टेशन Y की ओर जाती है। 2 घंटे के बाद, एक और ट्रेन स्टेशन Y से शुरू होती है और 20 किमी / घंटा की गति से स्टेशन X की ओर जाती है। स्टेशन X से निकलने वाली ट्रेन कितने घंटों के बाद स्टेशन Y से रवाना हुई ट्रेन से मिलेगी?
The distance between two stations A and B is 800 km. A train X starts from point A and moves towards point B at a speed of 40 km/h and another train Y starts from point B and moves towards A at 60 km/h. How far from A will they cross each other? दो स्टेशनों A और B के बीच की दूरी 800 किमी है | एक ट्रेन X बिंदु A से चलती है और B की तरफ 40 किमी/घंटा की चाल से जाती है तथा दूसरी ट्रेन Y बिंदु B से A की ओर 60 किमी/घंटा की चाल से चलना शुरू करती है | A से कितनी दूरी पर वे एक-दूसरे को पार करेंगी ?
A train runs 50% faster than a car. Both start running from the same point and meet after covering a distance of 360 km. In the middle of this journey, the train stops for two hours due to some faults in engine. What is the speed of the train ? / कोई रेलगाड़ी एक कार से 50% तेजी से चलती है | दोनों एक ही बिंदू से चलना शुरू करते हैं और 360 km की यात्रा के बाद आपस में मिलते हैं | यात्रा के बीच रेलगाड़ी इंजन में खराबी के कारण किसी स्टेशन पर 2 घंटों के लिए रुक जाती है | रेलगाड़ी की गति कितनी है ?
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुँची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुंच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए। चीड़ के पेड़ों को किससे बहुत नुकसान हो रहा था ?
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुँची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुंच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए। पेड़ कटने से किसका खतरा बढ़ जाएगा ?
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाए गए लोहे निकाल दिए व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारा का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुँची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकलने के लालच में चीड़ के पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधि कारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास-चारे का संकट है, वहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेन्द्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुंच गए। वहां एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहां बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा।" कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए। हेवल घाटी में किन पेड़ों के होने वाले विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले गए ?
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