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समुच्चय S=(1 ,omega, omega^(2)) पर संक्र...

समुच्चय `S=(1 ,omega, omega^(2))` पर संक्रिया गुणन `(xx)` के लिए संयोजन सारणी बनाइये (जहाँ `1 ,omega, omega^(2)` इकाई के धनमूल है)। दर्शाइए की गुणन `S` में द्विआधारी संक्रिया, क्रमविनिमेय और साहचर्य है। तत्समक अवयव ज्ञात कीजिए। `S` के प्रत्येक का प्रतिलोम अवयव ज्ञात कीजिए।

लिखित उत्तर

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गुणन संक्रिय `(xx)` के लिए समुच्चय S पर संक्रिया सारणी निम्न है-

[` :. Omega^(3)=1, omega^(4)= omega^(3)* omega = 1*omega=omega]`
(i) संयोजक सरणी की सभी प्रविष्टियाँ समुच्चय S के अवयव है, इसलिए संक्रिया गुणन `(xx)` समुच्चय `S` पर द्विआधारी है।
(ii) चूँकि संयोजन सारणी मुख्य विकर्ण के सममित है इसलिए संक्रिया गुणन `(xx)` समुच्चय S पर क्रमविनिमेय है ।
(iii) चूँकि `1=1+i0,omega=(1)/(2)+i(sqrt(3))/(2),omega^(2)=(1)/(2)-i(sqrt(3))/(2)`
सभी सम्मिश्र संख्याएँ है और सम्मिश्र संख्याएँ गुणन संक्रिया के अन्तगर्त क्रमविनियम और साहचर्य नियम का पालन करती है इसलिए द्विआधारी संक्रिया गुणन S पर क्रमविनिमेय और साहचर्य निमय का पालन करती है।
(iv) संयोजी सरणी की प्रथम पंक्ति सबसे ऊपरी पंक्ति के सम्पाती है तथा प्रथम स्तम्भ सबसे बायीं ओर के स्तम्भ के सम्पाती है तथा दोनों 1 मिलते है । अतः द्विआधारी संक्रिया `(xx)` के लिए, समुच्चय S में तत्समक अवयव 1 है। अथार्त `e=1`
चूँकि संयोजन सरणी के प्रत्येक पंक्ति स्तम्भ में तत्समक अवयव 1 है इसलिए समुच्चय S का प्रत्येक अवयव व्युत्क्रमणीय है ।
`1xx1= 1 rArr (1)^(-1)=1`
` omega xx omega^(2)=1 rArr (omega)^(-1)= omega^(2)`
`omega^(2)xx omega = 1 rArr (omega^(2))^(-1)= omega`
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