दो समांतर रेखीय धारावाही चालक में धारा समान दिशा में प्रवाहित होने पर वे एक - दूसरे को आकर्षित करते है तथा धारा विपरीत दिशा में प्रवाहित होने पर वे एक - दूसरे को प्रतिकर्षित करते है । दो समांतर चालकों के मध्य की दूरी r है इनमें धारा `I_(1)" व " I_(2)`के कारण निर्वात में प्रति एकांक लम्बाई पर क्रियाशील बल का मान `F = mu_(0)/(4pi) (2I_(1)I_(2))/r` है । उपरोक्त अनुच्छेद को पढ़कर निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए - (i) दोनों रेखीय समांतर धारावाही चालकों के मध्य बल का कारण क्या है ? (ii) यदि चालक तारों की लम्बाई 2 सेमी. तथा 20 सेमी. हो उनमें प्रवाहित धारा 2A व 5A हो । वे एक - दूसरे से 4 सेमी. की दूरी पर है । 20 cm लम्बे तार पर बल का मान क्या होगा । (iii) इसके अध्ययन की दैनिक जीवन में क्या उपयोगिता है ?
लिखित उत्तर
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(i) दो समांतर धारावाही चालकों में धारा प्रवाह के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के कारण यह बल लगता है । (ii) `l_(1) = 2 "सेमी" = 2 xx 10^(-2) " मी.," l_(2) = 20 xx 10^(-2)` मी. ` I_(1) = 2A , I_(2) = 5A , r = 4 xx 10^(-2) ` मी. ` :' ` क्रिया तथा प्रतिक्रिया एक - दूसरे के समान लेकिन विपरीत होते है अतः 20 सेमी तार पर प्रतिकर्षण बल का परिणाम = 2 सेमी लम्बे ताप पर प्रतिकर्षण बल ` = mu_(0)/(4pi) * (2I_(1)I_(2))/r l_(1)` ` = 10^(-7) xx ( 2 xx 2xx 5 xx ( 2 xx 10^(-2)))/( 4 xx 10^(-2))` ` = 10^(-6) N`. (iii) उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार दो समांतर चालकों के मध्य समान दिशा में धारा प्रवाहित करने पर वे एक - दूसरे को आकर्षित करते है अर्थात दो समान विचारधारा व कार्य पद्धति के व्यक्ति जब एक - साथ एक ही दिशा में मिलकर कार्य करते है तब वे सफलता को प्राप्त करते है । लेकिन यदि दो एकसमान स्थान पर परस्पर विपरीत विचारधारा व कार्यशैली के व्यक्ति एक साथ मिलकर कोई कार्य करते है तो उनमें टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है और उनकी सफलता रुक जाती है । यह समाज के सभी
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