एक आयताकार कुंडली जिसमे n फेरे है धारा I प्रवाहित हो रही है प्रत्येक का क्षेत्रफल A है, इसे एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में लटकाते है तब यह एक बल आघूर्ण का अनुभव करता है | `taunIBAsin theta`, जहाँ `theta` चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का कुण्डली के तल के अभिलम्ब से बना कोण है साम्यावस्था में कुण्डली पर बल का मान शून्य है तथा बल आघूर्ण भी शून्य है अतः कुण्डली की स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम है उपरोक्त परिच्छेद को पढ़कर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिए - (i) किन स्थितियों में चुम्बकीय क्षेत्र में लटकी हुई कुण्डली पर अधिकतम व न्यूनतम बल आघूर्ण लगेगा ? (ii) एक वृत्ताकार कुण्डली जिसमे फेरो की संख्या 100 त्रिज्या 5 सेमी तथा धारा 2A है इसे `0*20T` के चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाने पर यह कुण्डली के तल व क्षेत्र रेखा के साथ `60^(@)` का कोण अंतरिक करता है अतः इसे मुड़ने से रोकने के लिए कितने बल आघूर्ण की आवश्यकता होगी ? (iii)उपरोक्त अनुच्छेद किन जीवन मूल्यों को दर्शाता है ?
लिखित उत्तर
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(i) बल आघूर्ण `tau=nIBAsintheta` `tau=0,sintheta=sin90^(@)=1` `:.` न्यूनतम बल आघूर्ण `tau_(min)=0.IBAsintheta` `=0,[becausesintheta=0^(@)]` इस स्थिति में कुण्डली का तल चुंबकीय क्षेत्र के समान्तर है अब अधिकतम बल आघूर्ण `tau_(max)=nIBAsintheta` `tau_(max)=nIBA[becausetheta90^(@)]` (ii) `n=100,r=0*05` मी. `I=2A,B=0*20T` `theta=90^(@)-60^(@)=30^(@)` `:." "tau=nIBAsin theta=nIB(pir^(2))sin theta` `=100xx2xx0*20[pixx(0*05)^(2)]xxsin30^(@)` `=0*15Nm`. (iii) उपरोक्त परिच्छेद से ज्ञात होता है की जब कुण्डली की स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होगी तब कुण्डली पर लगने वाला बल तथा बल आघूर्ण दोनों ही शून्य होगा । यह वास्तविक जीवन में पूर्णतः सत्यापित होता है अर्थात जो व्यक्ति दयालु तथा शांत होता है अपनी तारीफ़ स्वयं नहीं करता वह जीवन में एक सुखी व्यक्ति होता है क्योकि उस पर किसी तरफ का कोई तनाव या दवाब नहीं होता है ।
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