गीवर गैस एक प्रकार से गैसी का मिश्रम है। जिसमें मीथेन भी उपस्थित होती है जी सुक्ष्यत्रीवी संक्रियता द्वारा ठत्पन्न होती है। कृुछ बैक्टीरिया जी सेल्युलीजीय पदार्थी पर अवायवीय रूप से उगते हैं, वह कार्यबन डाइ आवसाडड (CO,) तथा हाइड्रीजन (H) के साथ साथ बड़ी मात्रा में मीथेन (Methane) ठत्पन्न करते हैं। सामूदहिक रूप से इन जीवाणुओं की मीथेनोजेन (Methanogens) कहते हैं। इनमें सामान्य जीवाणु मीथेनोीबैक्टीरियम है।
पशुओं के मल (dung) को गीवर कहते हैं जिसमें ये जीवाणु प्रचुर संख्या में पाए जाते हैं जो गोवर गैस (गोबर gas) अथवा बायोगस (Biopas) का उत्पादन करते हैं।
बायोगैस संयंत्र अथवा गोबर गैस संयंत्र में एक बड़ा टैंक होता है जिसकी गहराई 10 सें 15 फीट होती है। इस टैंक में अपशिष्ट संगृहित एवं गोबर की कर्दम (Slurry) भरी जाती है कर्दम अथवा स्लरी के ऊपर एक सचल ढक्कन रखा जाता है, जिसे गैस होल्डर (Gas Holder) कहते हैं। सूक्ष्मजीवी सक्रियता के कारण अर्थात् मीथेनोजेन (Methanogens) बैक्टोरिया की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रियाओं के फलरूवरूप गैस का निर्माण होता है जिसके फलस्वरूप डक्कन अर्थात् गैस होल्डर (Gas holder) ऊपर उठता है बायोगैस संयंत्र में एक निकास होता है जिसकी सहायता से पाइप के द्वारा घरों में गैस की पूर्ति की जाती है। उपयोग में ली गई कर्दम घोल दूसरे निकास द्वारा बाहर निकाल दी जाती है। इसका उपयोग उर्वरक (Fertilizer) के रूप में किया जाता है।
बायोगैस/गोबर गैस के उपयोग-
1. खाना बनाने एवं प्रकाश पैदा करने में किया जाता है।
2. बायोगैस के उत्पादन के बाद बची स्लरी एक उत्तम मृदा खाद का कार्य करती है।
3. उक्त निर्मित खाद के उपयोग से रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।
4. बायोगैस के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण एवं जंगलों के विनाश को भी बचाया जा सकता है।
5. बायोगैस पेट्रोलियम गैस (L.P.G.) से, जिसे हम सामान्यतः घरों में इस्तेमाल करते हैं, बहुत सस्ती होती है।