क्रांतिक कोण-जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो आपतन कोण के उस मान को जिसके संगत अपवर्तन कोण का मान `90^@` होता है, क्रांतिक कोण कहते हैं।
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन-जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है। और जब आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण के मान से अधिक होता है, तो प्रकाश किरण दूसरे माध्यम में प्रवेश करने के बजाय उसी माध्यम में परावर्तित हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।
शर्ते-(1 ) प्रकाश किरण को सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए ।
(2) आपतन कोण के मान को क्रान्तिक कोण के मान से अधिक होना चाहिए।
माध्यम के अपवर्तनांक और क्रान्तिक कोण के मध्य सम्बन्ध- मानलो कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम (काँच) से विरल माध्यम (वायु) में जा रही है। यदि सघन माध्यम में आपतन कोण i तथा विरल माध्यम में अपवर्तन कोण है r, तो सघन माध्यम के सापेक्ष विरल माध्यम का अपवर्तनांक
`._gmu_a=(sin i)/(sin r)`
यदि i=C= क्रांतिक कोण हो , तो
`r=90^@`
`therefore ._gmu_a=(sin C)/(sin 90^@)`या `._gmu_a=sin C`
परन्तु `._gmu_a=1/(._amu_g)`
`therefore 1/(._amug) = sinC` या `._amu_g=1/(sin C)`
क्रांतिक कोण को प्रभावित करने वाले कारक - क्रांतिक कोण का मान निम्न कारकों पर निर्भर करता है-
(i) प्रयुक्त प्रकाश के रंग पर-बैंगनी रंग के लिये अपवर्तनांक सर्वाधिक होता है। अत: क्रान्तिक कोण का मान बैंगनी रंग के लिये सबसे कम तथा लाल रंग के लिए सबसे अधिक होता है ।
(ii) सघन और विरल माध्यम के जोड़े पर-क्रांतिक कोण का मान सघन और विरल माध्यम के जोड़े पर निर्भर करता है। काँच और वायु के जोड़े के लिए क्रांतिक कोण का मान लगभग `42^@`, जल और वायु के जोड़े के लिए लगभग `49^@` तथा हीरे और वायु के जोड़े के लिये `24^@` होता है।
(iii) ताप पर-ताप बढ़ाने पर माध्यम का अपवर्तनांक घटता है। अत: क्रांतिक कोण का मान बढता है।