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Class 12
PHYSICS
प्रकाश के व्यतिकरण से आप क्या समझते हैं ...

प्रकाश के व्यतिकरण से आप क्या समझते हैं ? दो तरंगे जिनके आयाम `a_(1) "व" a_(2)` तथा कोणीय आवृत्ति `omega` हैं , अध्यारोपित होती हैं । संपोषी और विनाशी व्यतिकरण की स्थिति में तीव्रता ज्ञात कीजिए ।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

मानलो एक ही आवृत्ति की दो तरंगे एक ही दिशा में गमन कर रही हैं । उनके समी. निम्नलिखित हैं -
`y_(1) = a_(1)sinomegat` ....(1)
`y_(2) = a_(2)sin (omega t + phi)` .....(2)
जहाँ `a_(1) "और" a_(2)` उनके आयाम तथा `theta` उनके मध्य कलान्तर हैं ।
प्रत्येक तरंग की आवृत्ति `v = (omega)/(2 pi)`
यदि दोनों तरंगें माध्यम के किसी बिंदु पर एक साथ पहुँचे तो अध्यारोपण के सिद्धांत से ,
`y = y_(1) + y_(2)`
या `y = a_(1)sinomega t + a_(2) sin(omega t + phi)`
या ` y = a_(1) sin omega t + a_(2) sin omega t cos phi + a_(2) cos omega t sin phi`
या ` y = (a_(1) + a_(2) cos phi ) sin omega t + a_(2) sin phi cos omega t ` .....(3)
अब मान लो
`a_(1) + a_(2) cos phi = R cos phi ` ....(4)
`a_(2) sin phi = R sin theta` ...(5)
जहाँ R और `theta` नये नियतांक हैं ।
समी (3) में मान रखने पर ,
`y = R cos theta sin omega t + R sin theta cos omega t `
या `y = R sin (omega t + phi)` ....(6)
समी. (6) परिणामी तरंग को प्रदर्शित करता हैं , जिसका स्वरुप अध्यारोपित तरंगों के समान ही है । अतः R परिणामी आयाम होगा ।
समी. (4) और (5) को वर्ग करके जोड़ने पर ,
`R^(2)cos^(2)theta + R^(2)sin^(2)theta = (a_(1) + a_(2) cos phi)^(2) + (a_(2) sin phi)^(2)`
या `R_(2)cos^(2)theta + sin^(2) theta) = a_(1)^(2) + 2a_(1)a_(2)cosphi + a_(2)^(2)cos^(2)phi + a_(2)^(2)sin^(2)phi`
या `R^(2) = a_(1)^(2) + 2a_(1)a_(2)cosphi+ a_(2)^(2)`
या `R^(2) = a_(1)^(2) + a_(2)^(2) + 2a_(1)a_(2)cosphi`
तीव्रता I आयाम R के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती हैं ।
परिणामी तीव्रता `I = K (a_(1)^(2) + a_(2)^(2) + 2a_(1)a_(2)cosphi)` ...(7)
जहाँ K एक आनुपातिक नियतांक हैं ।
समी. (7) से स्पष्ट हैं कि परिणामी तीव्रता दोनों तरंगों के कलान्तर पर निर्भर करती हैं ।
संपोषी व्यतिकरण के लिए शर्त - समी. (7) से स्पष्ट हैं कि अधिकतम तीव्रता के लिए ,
`cosphi = 1`
या `phi = 2pir = 2pin`, (जहाँ n = 0,1,2,3,4,......)
अतः जिन बिंदुओं पर व्यतिकरण करने वाली तरंगें समान कला में मिलती हैं अर्थात् उनके मध्य कलांतर 0 या `pi` का सम गुणक होता हैं , उन बिंदुओं पर परिणामी तीव्रता अधिकतम होती हैं ।
इस प्रकार , `I_(max) = K(a_(1)^(2) +a_(2)^(2) + 2a_(1).l_(2))`
`K(a_(1) + a_(2))^(2)`
यदि संपोषी व्यतिकरण के लिए पथांतर `Delta` हो , तो
`Delta = (pi)/(2pi) xx phi`
= `(pi)/(2pi)(2n -1 ) pi`
`= (2n -1)(pi)/(2) = (pi)/(2)` का विषम गुणक ।
संपोषी व्यतिकरण की स्थिति में परिणामी तीव्रता के लिए व्यंजक -
समी. (7) में `cos phi = 1` रखने पर ,
`I = K(a_(1)^(2) + a_(2)^(2) + 2a_(1)a_(2)) = K(a_(1) + a_(2))^(2)`
यदि `a_(1) = a_(2) = a ` हो , तो
`I = K (a + a)^(2) "या" I = 4ka^(2).`
विनाशी व्यतिकरण की स्थिति में परिणामी तीव्रता के लिए व्यंजक -
समी. (7) में `cosphi = -1` रखने पर ,
`I = K(a_(1)^(2) + a_(2)^(2) -2a_(1)a_(2)) = K(a_(1) - a_(2))^(2)`
यदि `a_(1) = a_(2) = a`
`I = K(a - a)^(2) = 0.`
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