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PHYSICS
बोर मॉडल की मूल परिकल्पनायें लिखिए। n वी...

बोर मॉडल की मूल परिकल्पनायें लिखिए। n वी कक्षा में स्थायी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।

लिखित उत्तर

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बोर की परिकल्पनायें- बोर ने तीन परिकल्पनायें की, जो निम्नलिखित है-
1. बोर की पहली परिकल्पना- किसी परमाणु में कोई इलेक्ट्रॉन निश्चित स्थायी कक्षाओं में विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित किए बिना परिक्रमण के सकता है। यह विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुमानों के विपरीत है। इस परिकल्पना के अनुसार प्रत्येक परमाणु की कुछ निश्चित स्थायी अवस्थाये है जिसमे यह रह सकता है और प्रत्येक संभव अवस्था में निहित कुल ऊर्जा निश्चित होती है। इन संभावित अवस्थाओं को परमाणु की स्थिर अवस्थाएँ कहते है।
2. बोर की द्वितीय परिकल्पना- बोर की द्वितीय परिकल्पना इन स्थायी कक्षाओं को परिभाषित करती है। इस परिकल्पना के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर केवल इन कक्षाओं में ही परिक्रमण करता है जिनके लिए कोणीय संवेग का मान `(h)/(2pi)` का पूर्णांक गुणज होता है। जहाँ h प्लांक नियतांक `(=6.6xx10^(-34)Js)`। अतः परिक्रमा करते हुए इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (L) क्वांटित है। अर्थात
`L=(nh)/(2pi)" ...(1)"`
3. बोर की तृतीय परिकल्पना- इस परिकल्पना के अनुसार कोई इलेक्ट्रॉन अपने विशेष रूप से उल्लेखित अविकिरणी कक्षा से दूसरी निम्न ऊर्जा वाली कक्षा में संक्रमण कर सकता है। जब यह ऐसा करता है तो एक फोटॉन उत्सर्जित होता है जिसकी ऊर्जा प्रारंभिक एवं अंतिम अवस्थाओं की ऊर्जा के अंतर् के बराबर होती है। उत्सर्जित फोटॉन की आवृत्ति निम्न व्यंजक द्वारा दी जाती है-
`hv=E_(i)-E_(f)" ...(2)"`
जहाँ `E_(i)` एवं `E_(f)` प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं की ऊर्जाएं है, `E_(i)gtE_(f)`|
इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग से संबंधित बोर की दूसरी परिकल्पना क्वांटमीकरण प्रतिबंध का प्रयोग करते है। कोणीय संवेग L होता है।
`L=mvr`
क्वांटमीकरण का बारे के दूसरी परिकल्पना [समी. (1)] के अनुसार कोणीय संवेग के अनुमत मान `(h)/(2pi)` के पूर्णांक गुणज होते है।
`L_(n)=mv_(n)r_(n)=(nh)/(2pi)" ...(3)"`
जहाँ n एक पूर्णांक है, `r_(n)` संभावित कक्ष `n^(th)` की त्रिज्या है तथा `v_(n), n^(th)` कक्ष में गतिमान इलेक्ट्रॉन की चाल है। अनुमत कक्षों को n के मान के अनुसार 1, 2, 3, ......... द्वारा क्रमांकित किया गया है, जिन्हे कक्ष की मुख्य क्वाण्टम संख्या कहते है।
हम जानते है `v_(n)` तथा `r_(n)` के बीच सम्बन्ध होता है।
`v_(n)=(e)/(sqrt(4piepsilon_(0)mr_(n)))`
इसे समीकरण (3) के साथ संयोजित करने पर हमे `v_(n)` तथा `r_(n)` के लिए निम्न व्यंजक प्राप्त होते है-
`v_(n)=(1)/(n)(e^(2))/(4piepsilon_(0)(h//2pi))" ... (4)"`
तथा `r_(n)=((n^(2))/(m))((h)/(2pi))^(2)(4piepsilon_(0))/(e^(2))" ... (5)"`
इसे बोर त्रिज्या कहते है और संकेत `a_(0)` द्वारा निरूपित करते है। इस प्रकार,
`a_(0)=(h^(2)epsilon_(0))/(pime^(2))" ...(6)"`
`h,m,epsilon_(0)` तथा e के मान प्रतिस्थापित करने पर `a_(0)=5.29xx10^(-11)m` प्राप्त होता है। समीकरण (5) से यह भी देखा जा सकता है कि कक्षों की त्रिज्याओं में `n^(2)` के साथ वृद्धि होती है।
किसी हाइड्रोजन परमाणु की स्थायी अवस्था इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा, समीकरण `E_(n)=(e^(2))/(8piepsilon_(0)r_(n))` में कक्षीय त्रिज्या का मान प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त की जा सकती है। यथा
`E_(n)=-((e^(2))/(8piepsilon_(0)))((m)/(n^(2)))((2pi)/(h))^(2)((e^(2))/(4piepsilon_(0)))" ...(7)"`
अथवा `E_(n)=-(me^(4))/(8n^(2)epsilon_(0)^(2)h^(2))" ...(8)"`
समी. (8) में नियतांकों के मान रखने पर हमे प्राप्त होगा
`E_(n)=-(2.18xx10^(-18))/(n^(2))J" ...(9)"`
परमाण्वीय ऊर्जाएँ प्रायः जूल के स्थान पर इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में व्यक्त की जाती है। क्योकि `1eV=1.6xx10^(-19)J`। समीकरण (9) को पुनः इस प्रकार लिखा जा सकता है-
`E_(n)=-(13.6)/(n^(2))eV`
किसी कक्ष में गतिमान इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा के व्यंजक में ऋणात्मक चिन्ह इस बात का घोतक है कि इलेक्ट्रॉन, परमाणु के नाभिक से आबद्ध है। अतः हाइड्रोजन परमाणु से इलेक्ट्रॉन को नाभिक से (या हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटॉन से) अनंत दूरी तल विलग करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
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