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Class 12
PHYSICS
L-C-R परिपथ में प्रतिबाधा के लिए सूत्र ज...

L-C-R परिपथ में प्रतिबाधा के लिए सूत्र ज्ञात कीजिए। किस स्थिति में बहने वाली धारा अधिकतम होगी?

लिखित उत्तर

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अनुनादी विद्युत् परिपथ-जब L-C परिपथ या L-C- R परिपथ में प्रतिबाधा का मान न्यूनतम होता है तो परिपथ में बहने वाली धारा का मान अधिकतम होता है। इस घटना को अनुनाद कहते है। इस स्थिति में प्रत्यावर्ती वि. वा. बल की आवृत्ति को अनुनादी आवृत्ति कहते हैं। यह परिपथ अनुनादी विद्युत् परिपथ कहलाता हैं।
प्रतिबाधा के लिए व्यंजक-मानलो चित्र (a) में दर्शाये अनुसार एक प्रेरकत्व L, धारिता C तथा प्रतिरोध R एक प्रत्यावर्ती वि. वा. बल के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े हुए है।
यदि किसी क्षण परिपथ में बहने वाली धारा I हो, तो प्रेरकत्व L के सिरों के बीच विभवान्तर
`V_(L)=IX_(L)` ....(1)
धारिता C के सिरों के बीच विभवान्तर,
`V_(C)=I.X_(C)` ....(2)

प्रतिरोध R के सिरों के बीच विभवान्तर,
`V_(R)=I.R` ...(3)
`V_(R)` और I समान कला में होते हैं, `V_(L)` धारा I से `90^(@)` अग्रगामी तथा `V_(C)` धारा I से 90° पश्चगामी होता है। अत: `V_(L)` और `V_(C)` के बीच 180° का कलान्तर होगा।
`V_(L)` और `V_(C)` का परिणामी `V_(L) - V_(C)` होगा।
स्पष्ट है कि `V_(L)- V_(C)` और `V_(R)` के बीच `90^(@)` कलान्तर होगा।
यदि परिणामी विभवान्तर V हो, तो
`V^(2)=V_(R)^(2)+(V_(L)-V_(C))^(2)`
या `V=sqrt(V_(2)^(R)+(V_(L)-V_(C))^(2))`

समी. (1), (2) और (3) से मान रखने पर,
`V^(2)=I^(2)R^(2)+I^(2)(X_(L)-X_(C))^(2)`
या `(V^(2))/(I^(2))=R^(2)+(X_(L)-X_(C))^(2)`
या `V/I=sqrt(R^(2)+(X_(L)-X_(C))^(2))` .....(4)
यदि समी. (4) की ओम के नियम से तुलना करें, तो `sqrt(R^(2)+(X_(L)-X_(C))^(2))` परिपथ का परिणामी प्रतिरोध होगा इसे इस परिपथ की प्रतिबाधा कहते हैं।
इस प्रकार परिपथ की प्रतिबाधा
`Z=sqrt(R^(2)+(X_(L)-X_(C))^(2))`
या प्रतिबाधा `Z=sqrt(R^(2)+(omegaL-1/(omegaC))^(2))` .....(5)
यही L-C-R श्रेणी परिपथ में प्रतिबाधा के लिए व्यंजक है।
अधिकतम धारा के लिए शर्त एवं अनुनादी आवृति के लिए व्यंजक -यदि विभान्तर V और धारा I के बीच कलान्तर `phi` हो, तो चित्र (b) से,
`tanphi=(V_(1)-V_(C))/R`
या `tanphi=(omegaL-1/(omegaC))/R`
`phi=tan^(-1)((omegaL-1/(omegaC))/R)`
अत: परिपथ में बहने वाली धारा निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त की जायेगी-
`I=I_(0)sin(omegat-phi)`
जहाँ `I_(0)=(V_(0))/Z=(V_(0))/(sqrt(R^(2)+(X_(L)-X_(C))^(2)))`
`therefore` धारा का आयाम `I_(0)=(V_(0))/(sqrt(R^(2)+(omegaL-1/(omegaC))^(2)))` .....(6)
यदि `omegaL=1/(omegaC)` हो, तो समी. (5) से,
Z = R (न्यूनतम) तथा `I_(0)=(V_(0))/R` (अधिकतम्)।
इस प्रकार इस स्थिति में परिपथ को प्रतिबाधा न्यूनतम तथा धारा अधिकतम होती है।
पुन: अनुनाद की स्थिति में,
`omegaL=1/(omegaC)`
`thereforeomega^(2)=1/(LC)`
या `omega=1/(sqrt(LC))`
या `2pif=1/(Sqrt(LC))` (जहाँ f = आवृ्ति)
`thereforef=1/(2pisqrt(LC))`
यही L-C-R परिपथ की अनुनादी आवृत्ति के लिए व्यंजक है।
इस परिपथ का उपयोग रेडियोगराही को ट्यूनिंग करने में किया जाता है।
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