प्रकाश - विद्युत प्रभाव -" जब किसी धातु के पृष्ठ पर कम तरंगदैर्घ्य का दृश्य प्रकाश आपतित होता है , तो धातु के पृष्ठ से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं । इस घटना को ही प्रकाश विद्युत - प्रभाव कहते हैं । "
धातु के पृष्ठ में बहने वाले इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश - इलेक्ट्रॉन कहते हैं तथा परिपथ में बहने वाली धारा को प्रकाश - विद्युत धारा कहते हैं ।
प्रकाश - विद्युत उत्सर्जन के नियम - ये नियम निम्नलिखित हैं :
(1) प्रत्येक धातु की सतह पर धातु के संगत एक न्यूनतम आवृति (देहली आवृति ) के विकिरण आपतित होने पर ही फोटो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं । उससे कम आवृत्ति के विकिरण से कभी नहीं , चाहें आपतित प्रकाश की तीव्रता कितनी ही हो ।
(2) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित विकिरण की आवृत्ति के अनुक्रमानुपाती होती है ।
(3) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या आपतित विकिरण की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है ।
(4) धातु की सतह पर विकिरण आपतित होते ही इससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं ।
प्रकाश - विद्युत उत्सर्जन के नियमों का प्रायोगिक सत्यापन -
प्रकाश - विद्युत उत्सर्जन के नियमों के प्रयोगिक सत्यापन करने के लिए प्रयोगिक व्यवस्था दी गई है । जब कैथोड C पर प्रकाश डाला जाता है , तो निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त होते हैं -
(1) समान तीव्रता का भिन्न - भिन्न आवृत्ति का प्रकाश डालने पर परिपथ में प्रवाहित धारा पर कोई प्रभाव नहीं होता हैं , लेकिन एक निश्चित आवृत्ति से कम आवृत्ति के प्रकाश के लिए परिपथ में कोई धारा नहीं बहती है । इससे नियम (1) सत्यापित होता है ।
(2) समान तीव्रता का , बढ़ते हुए क्रम में भिन्न - भिन्न आवृत्ति का प्रकाश डालने से परिपथ में प्रवाहित धारा को शून्य करने के लिए आवश्यक निरोधी विभव का मान बढ़ता है अर्थात् कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ती है । इस प्रकार नियम (2) सत्यापित होता है ।
(3) आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर परिपथ में प्रवाहित धारा बढ़ती है अर्थात् कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है । इससे नियम (3) सत्यापित होता है ।
(4) कैथोड पर प्रकाश के पड़ते ही तुरंत परिपथ में धारा बहने लगती है । इससे नियम (4) सत्यापित होता है ।