सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित संख्या अपरिमेय है: `sqrt(5)`
लिखित उत्तर
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(i) माना `1/(sqrt(2))` एक परिमेय संख्या है। माना `1/(sqrt(2))=p/q` जहां `q!=0` तथा `p` और `q` पूर्णांक है। `impliesq=sqrt(2)pimpliesq^(2)=2p^(2)`………………..1 अब `2p^(2),2` से विभाज्य है। `impliesq^(2) ,2` से विभाज्य है। `impliesq,2` से विभाज्य है। माना `q=2rimpliesq^(2)=4r^(2)implies2p^(2)=4r^(2)` समी 1 से `implies p^(2)=2r^(2)` अब`2r^(2),2` से विभाज्य है। `impliesp^(2),2` से विभाज्य है। `impliesp,2` से विभाज्य है। `:.p` और `q` में 2 सार्वनिष्ठ गुणनखण्ड है। जो हमारी पूर्व धारण के विपरीत है। अतः हमारी कल्पना गलत है। अर्थात `1/(sqrt(2))` एक अपरिमेय संख्या है। (ii) माना `7sqrt(5)` एक परिमेय संख्या है। माना `7sqrt(5)=p/q` जहां `q!=0` तथा `p` और `q` पूर्णांक है। `implies sqrt(5)=p/(7q)` `:’p` और `q` पूर्णांक है तथा `q!=0` `:.p/(7q)` एक परिमेय संख्या है। प्रश्न 1 से `sqrt(5)` एक अपरिमेय संख्या है अब एक अपरिमेय संख्या और एक परिमेय संख्या बराबर है। जो सम्भव नहीं है। अतः यह हमारी पूर्व धारणा के विपरीत है। `:.` हमारी कल्पना गलत है। अर्थात `7sqrt(5)` एक अपरिमेय संख्या है। (iii) माना `6+sqrt(2)` एक परिमेय संख्या है। माना `6+sqrt(2)=p/q` जहां `q!=0` तथा `p` और `q` पूर्णांक है। `impliessqrt(2)=p/q-6` अब `p/q-6` एक परिमेय संख्या है। तथा `sqrt(2)` एक परिमेय संख्या है। अब एक अपरिमेय सख्या और एक परिमेय संख्या बराबर है। जो सम्भव नहीं है। अतः यह हमारी पूर्ण धारण के विपरीत है। `:.` हमारी कल्पना गलत है। अतः `6+sqrt(2)` एक अपरिमेय संख्या है।