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PHYSICS
एक सेंटीमीटर त्रिज्या वाले विलगित हुए (...

एक सेंटीमीटर त्रिज्या वाले विलगित हुए (isolated) एक ताम्र गोले को एक कूलोम आवेश से आवेशित नहीं किया जा सकता है। व्याख्या करे।

लिखित उत्तर

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जब किसी परावैद्युत (dielectric) में प्रबल विद्युत-क्षेत्र उत्पन्न होता है तब उसके परमाणुओं के बाह्य इलेक्ट्रॉन (outer electrons) उस परमाणु से अलग हो जाते हैं और आयनीकरण (ionisation) की क्रिया होती हैं। ऐसी स्थिति में परावैद्युत एक चालक (conductor) जैसा व्यवहार करने लगता है और चिनगारी (spark) के रूप में क्षणिक रूप से सुचालक पथ (conducting path) उत्पन्न होते हैं। प्रबल विद्युत-क्षेत्र में परावैद्युत के आयनित होने की घटना को विद्युत-भंजन (electric breakdown) कहा जाता है। अतः, किसी चालक की आवेशित करने के कर्म में उत्पन्न क्षेत्र को एक महत्तम मान तक ही होना चाहिए जिससे की विद्युत-भंजन नहीं हो। किसी परावैद्युत के विद्युत-भंजन के लिए जो न्यूनतम विद्युत-क्षेत्र आवश्यक होता है उसे उस परावैद्युत की शक्ति कहते हैं। सामान्य दाब पर वायु के लिए परावैद्युत शक्ति का मान लगभग `3xx10^(6)Vm^(-1)` होता है।
अब यदि R त्रिज्या वाले किसी गोले को q आवेश से आवेशित किया जाए तब उसकी सतह के निकट, अर्थात वायु में विद्युत-क्षेत्र `E=1/(4 pi in_(0)) q/R^(2)`
यदि `q =1` कूलोम तथा `R=1 cm=1 xx 10^(-2) m` हो (प्रश्नानुसार) तब विद्युत-क्षेत्र
`E=1/(4 pi in_(0))xx(1C)/((10^(-2)m)^(2))=9xx10^(9) mF^(-1) xx10^(4) Cm^(-2) =9xx10^(13) V m^(-1)`.
विद्युत-क्षेत्र का यह मान परावैद्युत शक्ति के मान की तुलना में बहुत अधिक है। यदि कारण है की 1 cm के ताम्र (अधिक विद्युत के सुचालक) गोले को 1 कूलोम आवेश से आवेशित नहीं किया जा सकता है।
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