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Class 12
PHYSICS
चित्र 21.-12 में विभवमापी के तार के AB स...

चित्र `21.-12` में विभवमापी के तार के AB सिरों के बीच विधुत-वाहक बल 2V तथा आंतरिक प्रतिरोध `0.40Omega` का मुख सेल जोड़कर स्थायी विभावंतर बनाए रखा गया है। `1.02V` के अचर विधुत-वाहक बल के मानक सेल (standard cell) को `600Omega` के उच्च प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़कर (ताकि मानक सेल से बहुत अल्प धारा ली जा सके) संतुलन-बिंदु की स्थिति ज्ञात की जाती है। संतुलन की यथार्थ (exact) स्थिति ज्ञात करने के लिए उच्च प्रतिरोधक `(600k Omega)` के लघुपथित (shorted) किया जाता और गैल्वेनोमीटर में शून्य विक्षेप `67.3cm` पर प्राप्त होता है। इसी प्रकार मानक सेल को हटाकर अज्ञात विधुत-वाहक बल `epsi` के साथ संतुलन बिंदु की स्थिति तार के `82.3cm` लंबाई पर प्राप्त होती है। निम्नाकिंत प्रश्नों के उत्तर दे :
(a) अज्ञात विधुत-वाहक बल `epsi` का मान क्या है?
(b) क्या उच्च प्रतिरोध की उपस्थिति में संतुलन-बिंदु प्रभावी होता है?
(c) `600 Omega` के उच्च प्रतिरोधक को जोड़ने का क्या प्रयोजन है ?
(d) क्या मुख्य सेल (2V) अथार्त, परिचालक सेल (driver cell) के आंतरिक प्रतिरोध से संतुलन बिंदु की स्थित प्रभावित होती है ?
(e) इस व्यवस्था में यदि परिचालक सेल का विधुत-वाहक बल 2V के बलदे 1V का हो, तो क्या प्रयोग विधि- सफल रहेगी?
(f) क्या यह परिपथ (circuit) कुछ `mV` (मिलिवोल्ट) की कोटि के बहुत अल्प विधुत-वाहक वालों के निर्धारण में पर्योक्त की जा सकती है ? यदि, नहीं तो आप इसमें किस प्रकार का संशोधन करेंगे?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

(a) चित्र `21.-12` के अनुसार `2V` का मुख्य सेल विभवमापी के तार `AB` के सिरों के बीच लगाया गया है। `1.02 V` के मानक सेल से बिंदु `A` से `67.3cm` पर संतुलन बिंदु प्राप्त होगा है। इसी प्रकार अज्ञात विधुत-वाहक बल के लिए संतुलन-बिंदु `A` से `82.3cm` पर प्राप्त होगा है। विभवमापी के सिद्धांत से,
`(epsi_(1))/(epsi_(2))=(l_(1))/(l_(2)) " "...(1)`
प्रश्न से `epsi_(1)=1.02V,l_(1)=67.3 c, l_(2)=82.3 cm`
`:.` समीकरण 1 से, `(1.02V)/(epsi)=(82.3cm)/(67.3cm)`
`:.` अज्ञात विधुत-वाहक बल `epsi_(2)=(1.02V)(82.3)/(67.2)=1.247V~~1.25V`
(b) सन्तुल बिंदु प्राप्त होने पर गैल्वेनोमीटर से धारा, प्रवाहित नहीं होती है, अतः प्रतिरोध कुछ भी हो, संतुलन-बिंदु की स्थिति प्रभावित नहीं होगी।
(c) जब जॉकी का स्पर्श-बिंदु, संतुलन की स्थिति से काफी दूर हो तब मानक सेल से अल्पतम धारा लेने के लिए उच्च प्रतिरोध `(600 Omega)` श्रेणीबद्ध किया जाता है।
(d) मुख्य (परिचालक) सेल के आंतरिक प्रतिरोध से सन्तुल बिंदु की स्थित अवश्य प्रभावित होती है, क्योकि तार AB से प्रवाहित धारा का मान सेल के आंतरिक प्रतिरोध पर भी निर्भर करता है यदि AB से प्रवाहित धारा अचर राखी जाए, तब संतुलन-बिंदु की स्थिति आंतरिक प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करेगी।
(e) विभवमापी के तार `AB` पर संतुलन-बिंदु प्राप्त होने के लिए, यह आवशयक है की मुख्य सेल (अथार्त परिचालक सेल) का विधुत-वाहक बल, तुलना करने के लिए प्रयुक्त सेलों के विधुत-वाहक बालों से अधिक हो। यदि परिचालक सेल का विधुत-वाहक बल `1V` हो, तो मानक सेल `(1.02V)` के साथ `AB` के बीच संतुलन प्राप्त होगा ही नहीं , फलत प्रयोग विधि साफा नहीं होगी ।
(f) कुछ मिलोवोल्ट (mV) की कोटि के विधुत वाहक बल के मापन में परशान में दिया गया परिपथ उचित नहीं होगा, क्योकि संतुलन बिंदु का सथ्यन तार के एक सिरे A के बहुत निकट होगा और इसके मापन में प्रतिशत त्रुटि बहुत अधिक होगी।
इतने अल्प कोटि के विधुत-वाहक बल के सही मापन के लिए परिपथ में कुछ संशोधन (modification ) आवशयक है। यदि तार `AB` के श्रेणीक्रम में उपयुक्त प्रतिरोध का प्रतिरोधक जोड़ दिया जाए तब तार AB के बीच विभव-पतन (potential drop) मापे जाने वाले विधुत-वाहक से थोड़ा अधिक होगा। ऐसी स्थिति में सतुलन-बिंदु , तार की अधिक लंबाई पर होगा तथा पतिशत काफी कम होगी ।
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