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Class 12
PHYSICS
किसी गैलवेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध 1...

किसी गैलवेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध `12 Omega` है । इसमें `4mA` की विधुत-धारा प्रवाहित होने पर पूर्ण स्केल विक्षेप प्राप्त होता है । इस गैलवेनोमीटर को शून्य से `18 V` तक के परास (range) वाले वोल्ट्मीटर में किस प्रकार बदलेंगे ?

लिखित उत्तर

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प्रश्न से, गैलवेनोमीटर की कुंडली के प्रतिरोध `G = 12 Omega,`
पूर्ण विक्षेप के लिए प्रवाहित धारा `I = 4 mA = 4 xx 10^(-3)A`
`:.` गैलवेनोमीटर की कुंडली के सिरों के बीच विभवांतर,
`V = I xx G = (4 xx 10^(-3)A) (12 Omega) = 48 xx 10^(-3) V`.
अब , 18V के विभवांतर के कारण पूर्ण विक्षेप के लिए धारा का मान 4mA ही होना चाहिए, स्पष्टत : गैलवेनोमीटर के श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध R जोड़ना होगा ।
ओम के नियम से,
`I = (V)/(G + R)` या `4 xx 10^(-3) A = (18 V)/(12 Omega + R)`
या`R + 12 Omega = ((18V))/((4 xx 10^(-3)A)) = 4500Omega`
या `R = 4500Omega - 12 Omega = 4488 Omega`.
`:.` गैलवेनोमीटर के श्रेणीक्रम में `4488 Omega` के प्रतिरोधक की जोड़कर उससे `18V` तक का विभवांतर मापा जा सकता है ।
[विकल्पतः- विभवांतर का प्रारंभिक परास `= 48 xx 10^(-3) V` , अंतिम परास `= 18 V`.
`:.n = (18)/(4 xx 10^(-3)V) = 375`.
अतः, श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधक का अभीष्ट प्रतिरोध,
`r = (n-1)G = (375 -1 ) (12 Omega = 44888 Omega`]
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