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BIOLOGY
एक पुष्प में निषेचन पश्च परिवर्तनों की व...

एक पुष्प में निषेचन पश्च परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए। 

लिखित उत्तर

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निषेचन के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में परिवर्तन-निषेचन के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में निम्न परिवर्तन दिखाई देते हैं-
(1) द्विगुणित जाइगोट भ्रूण (Embryo) का निर्माण करता है जो बीज में अत्यन्त सूक्ष्म रूप से मौजूद रहता है । भ्रूण प्रांकुर (Plumule), मूलांकुर (Radicle) और बीजपत्रों (Cotyledons) से मिलकर बनता है |
(2) त्रिक संलयन से बना प्राथमिक एण्डोस्पर्म केन्द्रक विभाजित होकर भ्रूणपोष (Endosperm) बनाता है। यह विकसित होते हुए भ्रूण को खाद्य या पोषण प्रदान करने का कार्य करता है।
(3) भ्रूण के पूर्ण विकसित होने तक, बीजाण्डकाय (Nicelins) पर्णत: खत्म हो जाता है, किन्तु कुछ पौधों में जैसे, पान आदि में यह भ्रूण निर्माण के बाद भी खाद्य प्रदायी पोषक (Nutritive) ऊतक के रूप में विद्यमान रहता है, तब इसे परिभ्रूणपोष (Perisperm) कहा जाता है।
(4) बाहरा अध्यावरण (Outer integument) बीजकवच या बीजावरण (Testa) और आन्तरिक अध्यावरण टेग्मेन (Tegmen) कहलाता है। ये दोनों मिलकर बीजचोल (Seed coat) बनाते हैं।
(5) निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड बीज बनता है।
(6) निषेचन के बाद अण्डाशय (Ovary), फल (Fruit) में रूपान्तरित होता है । फल की दीवार फलभित्ति (Pericarp) कहलाती है।
(7) वर्तिका (Style) गिर जाती है और फल पर अपना चिन्ह छोड़ जाती है।
(8) पुष्प के अन्य भाग जैसे-पुंकेसर, दलपुंज (Petals) गिर जाते हैं। कुछ फलों में (सोलेनेसी कुल के) कैलिक्स फल बनने पर भी लगे रहते हैं, जिन्हें चिरलग्न (Perisistent) कहा जाता है।
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