सहसंयोजी अणुओं की ज्यामिति सिद्धांत के आधार पर स्पष्ट की जा सकती है। इस सिद्धांत के अनुसार -
(1) किसी अणु की ज्यामिति केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में उपस्थित बंधी तथा एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म या अनाबन्धी इलेक्ट्रॉन युग्म की संख्या पर निर्भर करती है। (2) अणु के केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में केवल बंधित इलेक्ट्रॉन युग्म होने पर अणु की ज्यामिति सममित होती है तथा अणु की ज्यामिति संकरण के प्रकार पर निर्भर करती है। यदि संयोजकता कोश में क्रमश : 2,3,4,5,6 तथा 7 बंधी इलेक्ट्रॉन युग्म है तो अणु की ज्यामिति क्रमश : रेखीय , समतलीय त्रिभुजीय , समचतुष्फलकीय , त्रिभुजीय द्विपिरामिडीय, अष्टफलकीय तथा पंचभुजीय द्विपिरामिडीय होती है। (3) यदि अणु के केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोश में बंधी तथा एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित हो तो अणु की ज्यामिति सममित नहीं रहती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण बंधी तथा एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म में अधिक प्रतिकर्षण होता है , जिसके कारण अणु की ज्यामिति नष्ट हो जाती है , विभिन्न इलेक्ट्रॉन युग्मों में प्रतिकर्षण का क्रम निम्नलिखित होता है ,
Lone pair - Lone pair `gt` Lone pair - Bond pair `gt` Bond pair - Bond pair .
(4) केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या में वृद्धि करने पर बंधी इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य बंध कोण का मान कम हो जाता है। (5) केंद्रीय परमाणु के संयोजकता कोश में यदि इलेक्ट्रॉन पूर्ण भरा है तो उसके बंधित इलेक्ट्रॉन युग्मों में प्रतिकर्षण अपूर्ण संयोजकता कोश के बन्धित इलेक्ट्रॉन युग्मों के प्रतिकर्षण से अधिक होता है।
सीमायें - (1) इस सिद्धांत के आधार पर संक्रमण धातुओं के जटिल लवणों के आकृतियों की घोषणा नहीं की जा सकती है। (2) इस सिद्धांत की सहायता से ऐसे अणुओं की आकृतियों को नहीं समझाया जा सकता जिसमें बहुत अधिक सीमा में विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉन है। अत्यधिक ध्रुवीय यौगिक जैसे `Li_(2)O` की आकृति की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
