जब किसी वस्तु को किसी प्रारंभिक वेग से ऊर्ध्वाधर के अलावा अन्य दिशा में फेंका जाता है तो वह वस्तु ऊर्ध्वाधर तल में गति करती हुई पृथ्वी पर किसी अन्य स्थान पर गिरती है तो वस्तु की इस गति को प्रक्षेप्य गति कहते है। इसका अध्ययन निम्न दो स्थितियों में किया जाता है-
जब पृथ्वी तल से क्षैतिज दिशा के साथ किसी कोण पर प्रक्षेप्य को फेंका जाये-
माना कोई वस्तु मूलबिंदु O से क्षैतिज के साथ `theta` कोण बनाते हुए प्रारंभिक वेग u से फेंकी जाती है। तब वेग u को दो समकोणिक घटको में वियोजित किया जा सकता है-
(i) `ucostheta`- क्षैतिज घटक
(ii) `usintheta`-ऊर्ध्वाधर घटक
ऊर्ध्वाधर दिशा में गति के लिए- माना वस्तु द्वारा t सेकण्ड में चली गई ऊर्ध्वाधर दूरी y है। तब प्रारंभिक वेग `=usintheta` तथा त्वरण `-g` होगी।
अतः समीकरण `s=ut+(1)/(2)at^(2)` से,
`y=usintheta.t-(1)/(2)g t^(2)" "...(1)`
क्षैतिज दिशा में गति के लिए- माना वस्तु द्वारा t सेकण्ड में चली गई क्षैतिज दूरी x है। क्षैतिज दिशा में वेग नियत है।
अतः `s=ut` से,
`x=ucostheta.t`
`therefore t=(x)/(ucostheta)`
यह मान समी. (1) में रखने पर,
`y=usintheta.(x)/(ucostheta)-(1)/(2)g.(x^(2))/(u^(2)cos^(2)theta)`
या `y=xtantheta-(gx^(2))/(2u^(2)cos^(2)theta)" "...(2)`
यदि प्रक्षेप्य पथ का समीकरण है।
