पलायन वेग-पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी पिण्ड को पृथ्वी की सतह के ऊपर की ओर फेंके जाने पर वह गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है, पृथ्वी पर वापस नहीं आता।
मानलो पृथ्वी का द्रव्यमान M तथा त्रिज्या R है। किसी क्षण पर m द्रव्यमान का एक पिण्ड पृथ्वी के केन्द्र से x दूरी पर स्थित है।
पृथ्वी द्वारा m द्रव्यमान के पिण्ड पर आरोपित बल
` F = (GMm)/(x^2)`
इस गुरुत्वीय बल के विरुद्ध पिण्ड को dx दूरी तक ले जाने में किया गया कार्य
`dW = Fdx = (GMm)/(x^2) dx`
अतः पिण्ड को पृथ्वी की सतह (x=R) से अनन्त दूरी (x = `oo`) तक ले जाने में किया गया कुल कार्य
` W = = int_R^oo Fdx`
`=int_R^oo (GMm)/(x^2) dx`
` =GMmint_R^oo (1)/(x^2) dx`
` = GMm[(x^(-1))/(-1)]_R^oo`
` =- GMm ((1)/(oo) - 1/R) = (GMm)/(R)`
यदि पिण्ड का पलायन वेग v हो, तो
पिण्ड की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा `= 1/2 mv^2`
अब पलायन वेग जनित गतिज ऊर्जा = वस्तु को गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर ले जाने में किया गया कार्य
`therefore 1/2 mv^2 = (GMm)/(R)`
` v^2 = (2GM)/(R) `
`therefore v = sqrt((2GM)/(R)) " " ...(1)`
किन्तु ` g = (GM)/(R^2)`
` GM' = gR^2`
समी. (1) में मान रखने पर,
` v = sqrt((2gR^2)/(R))`
` v = sqrt(2gR)` ही अभीष्ट व्यंजक है। .....(2)`
समी. (2) में m नहीं है। अतः पलायन वेग का मान पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।