(i) उभयनिष्ठ विभव-मानलो A और B दो विलगित चालक हैं, जिनकी धारिताएँ क्रमशः `C_1` और `C_2` हैं। इन चालकों को क्रमशः `Q_1` और ` Q_2` आवेश देने पर उनके विभव क्रमशः `V_1 और V_2` हो जाते हैं।
अतः कुल आवेश
`Q=Q_1+Q_2 " " ....(1)`
परन्तु ` Q_1 = C_1 V_1`
` Q_2 = C_2V_2`
समी. (1) में मान रखने पर,
` Q = C_1V_1 + C_1V_2`
दोनों चालकों की कुल धारिता
`C = C_1+C_2`
मानलो दोनों चालकों को तार द्वारा जोड़ने पर उनका उभयनिष्ठ विभव V हो जाता है।
अतः सूत्र Q = CV से,
` Q_1 + Q_2 = (C_1 +C_2) V`
` V = (Q_1+Q_2)/(C_1 +C_2)`
` V = (C_1V_1 +C_2V_2)/(C_1 +C_2)`
यही उभयनिष्ठ विभव के लिए व्यंजक है।
(ii) संयोजन में ऊर्जा ह्रास-दोनो लकों को जोड़ने से पहले A और B की कुल ऊर्जा,
` U_1 = 1/2 C_1 V_1^2 + 1/2 C_2V_2^2`
दोनों चालकों को जोड़ने के बाद A और B की कुल ऊर्जा
` U_2 = 1/2 C_1V^2 +1/2 C_2V^2`
` = 1/2 (C_1 +C_2) V^2`
` = 1/2 (C_1 +C_2) ( (C_1V_1 + C_2 V_2)/(C_1 +C_2))^2`
`= 1/2 ((C_1V_1 + C_2 V_2)^2)/(C_1 + C_2)`
` therefore U_1 +C_2 = (1/2 C_1 V_1^2 + 1/2 C_2V_2^2 ) - 1/2 ((C_1V_1 + C_2V_2)^2)/(C_1 +C_2)`
`= 1/2 [((C_1V_1^2 +C_2V_2^2 ) (C_1+C_2) - (C_1V_1 + C_2V_2)^2)/(C_1 +C_2) ]`
` =1/2 [ (C_1C_2V_1^2 + C_1C_2V_2^2 - 2C_1C_2V_1V_2)/(C_1+C_2)]`
` = 1/2 . (C_1C_2)/(C_1 +C_2) [ V_1^2 + V_2^2 - 2 V_1V_2] = (C_1C_2)/(2(C_1+C_2)) (V_1 + V_2)^2`
चूँकि `(V_1 - V_2)^2` धनात्मक है, अत: `U_1 - U_2` भी धनात्मक होगा। अतः आवेश के पुनर्वितरण में सदैव ऊर्जा का ह्रास होता है।
इस प्रकार, ऊर्जा ह्रास ` = (C_1C_2)/(2 (C_1 +C_2)) (V_1 - V_2)^2`