(a) प्रतिकृतियन का उद्भव (Origin of replication or Ori)—किसी भी वाहक (जैसे प्लाज्मिड) का वह स्थान जहाँ से प्रतिकृतियन का प्रारम्भ होता है, प्रतिकृतियन उत्पत्ति स्थल या ओरि (Ori) कहा जाता है। 'ओरि' का उपस्थित होना किसी भी संवाहन वाहक (Cloning vector) का आवश्यक गुण है। पुनर्योगज डी. एन. ए. तकनीक में विजातीय डी. एन. ए. को 'ओरि' के साथ जोड़ देने पर वह पोषी कोशिका में प्रतिकृतिकरण कर सकता है। प्रतिकृतियन उद्भव स्थल का अनुक्रम ही जोड़े गए डी. एन. ए. की प्रतिकृति संख्या (Copy number) के लिए भी उत्तरदायी होता है। प्लाज्मिड में ऐसे अनुक्रम प्राकृतिक रूप से उपस्थित होते हैं।
(b) बायोरिएक्टर (Bioreactor)– बायोरिएक्टर स्टेनलेस स्टील से बने बेलनाकार व विशालपात्र होते हैं, जिनमें रिकॉम्बीनेंट जीन का उत्पाद, जीवाणु/अन्य कोशिकाओं के संवर्धन द्वारा प्राप्त किया जाता है। व्यावसायिक स्तर पर रिकॉम्बीनेंट प्रोटीन प्राप्त करने हेतु ही बायोरिएक्टर का प्रयोग होता है।
सामान्य रूप से प्रयोग किया जाने वाला एक बायोरिएक्टर साधारण विलोडन हौज बायोरिएक्टर (स्टिर्ड बैंक बायोरिएक्टर) है। इसमें माध्यम को अच्छी तरह मिलाने के लिए एक मजबूत विलोडक (stirrer) के साथ-साथ वातन (aeration), ताप नियंत्रण, pH नियंत्रण व फोम नियंत्रण की भी सुविधा होती है।
बायोरिएक्टर वांछित उत्पाद पाने के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराता है। बायोरिएक्टर में प्रतिचयन प्रहार (sampling port) भी लगा होता है जिससे संवर्धन की थोडी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।
दण्ड विलोडक हौज बायोरिएक्टर या स्पार्ल्ड टैंक बायोरिएक्टर, स्टिर्ड टैंक बायोरिएक्टर का परिवर्तित रूप है। इसमें वायु छोटे-छोटे बुलबुलों के रूप में प्रविष्ट करायी जाती है जो ऑक्सीजन स्थानान्तरण क्षेत्र में वृद्धि कर देते हैं।
(c) अनुप्रवाह संसाधन (Downstream processing)-बायोरिएक्टर में जैव रासायनिक क्रिया से प्राप्त रिकॉम्बीनेंट प्रोटीन का पृथक्करण व शुद्धीकरण अनुप्रवाह संसाधन कहलाता है। अनप्रवाह संसाधन में उत्पाद को उचित परिरक्षक के साथ संरूपित (formulate) भी किया जाता है। अगर उत्पाद कोई औषधि है तब ऐसे फार्मुलेशन का चिकित्सीय परीक्षण भी किया जाता है। सभी तरह के उत्पादों को सुनिश्चित गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षणों से भी गुजारते हैं। इसी के बाद पूर्ण रूप से परिष्कृत उत्पाद को विपणन हेतु भेजा जाता है।