आनुवंशिक रोगों (उपापचय की जन्मजात विसंगति से सम्बन्धित रोगों) का उपचार सामान्य रूप से कार्यशील जीन की रोगी की कोशिकाओं में प्रविष्टि द्वारा करना, जीन थेरेपी कहलाता है इन रोगों के उपचार का सिद्धान्त यह है कि विकारयुक्त या त्रुटिपूर्ण जीन को सामान्य जीन द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाय ।
इसका एक उदाहरण ADA की कमी का उपचार है | ADA की कमी मनुष्य के स्किड (SCID)-सीवियर कम्वाइंड इम्यूनो डेफिशिएंसी नामक गम्भीर रोग पैदा कर देती है। यह रोग एन्जाइम एडेनोसीन डीएमीनेज को कोड करने वाली जीन के विलोपन (Deletion) से होता है। रोग में शरीर का प्रतीक्षा तंत्र बहुत कमजोर हो जाता है। रोग का उपचार हॉर्मोन प्रतिस्थापन चिकित्सा (हार्मोनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) से किया जाता है। कुछ रोगियों में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण भी किया जाता है लेकिन दोनों ही उपचार स्थायी नहीं है इनको बार-बार दोहराना पड़ता है इससे रोगी के रक्त से प्राप्त लिम्फोसाइट को शरीर से बाहर सम्बर्धित किया जाता है रिट्रोवाइस की मदद से इन कोशिकाओं में सामान्य प्रकार्यशील ADA को कोडित करने वाले c-DNA को स्थापित कर दिया जाता है। इन अभियन्त्रित कोशिकाओं को पुनः रोगी के शरीर में प्रविष्ट करा दिया जाता है। इन कोशिकाओं की निश्चित जीवन अवधि होती है अतः इन्हे निश्चित समयान्तराल पर पुनः स्थापित करने की आवश्यकता होती है अगर अस्थि मज्जा कोशिकाओं (स्टेम कोशिकाओं) से यह जीन लेकर उसे प्रारम्भिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं में प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो स्थायी लाभ मिल सकता है।
