नर में प्राथमिक जनन अंग एक जोड़ी वृषण (testes) होते हैं। यह चौथे से छठे उदरीय खण्ड के पाश्श्व में व्यवस्थित होते हैं। प्रत्येक वृषण से एक पतली नलिका शुक्रवाहिनी निकलती है। जो शुक्राशय से होते हुए स्खलन वाहिनी में खुलती है। स्खलन वाहिनियाँ नर जनन छिद्र में खुलती हैं जो गुदा के अधर में स्थित होता
है। सहायक ग्रन्थि छन्नक रूपी होती हैं। यह मशरूम ग्रन्थि उदर के छठे व सातवें खण्ड में स्थित होती हैं।
नर कॉकरोच में बाह्य जननेन्द्रिय नंर गोनेपोफाइसिस अथवा शिश्न खण्ड के रूप में पायी जाती है। यह जनन रन्ध्र के चारों ओर काइटिनी असममित संरचना है ।
शुक्राशय में शुक्राणुओं का संग्रह होता है । शुक्राणु पुंज के रूप में आपस में चिपके रहते हैं तथा शुक्राणुधर कहलाते हैं। यह मैथुन के समय विसर्जित कर दिये जाते हैं ।