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BIOLOGY
कैल्विन-चक्र को केवल रेखाचित्र द्वारा सम...

कैल्विन-चक्र को केवल रेखाचित्र द्वारा समझाइए।

लिखित उत्तर

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प्रकाश-संश्लेषण की दूसरी महत्त्वपूर्ण अभिक्रिया को इसके प्रथम आविष्कारक के नाम पर ब्लैकमैन प्रतिक्रिया तथा आधुनिक अध्ययनकर्ता कैल्विन के नाम पर कैल्विन-चक्र

(Calvin-cycle) कहते हैं। इस क्रिया हेतु प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए इसे अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) भी कहते हैं। इस क्रिया का समीकरण अग्रलिखित है--
`6"RuBP"+6CO_(2)+12"NADPH"+18"ATP"toC_(6)H_(12)O_(6)+12"NADP"+18"ADP"+6"RuBP"+18iP`
अप्रकाशिक अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा भाग में सम्पन्न होती है। इसके निम्न प्रमुख पद हैं
(i) कार्बोक्सिलीकरण-सबसे पहले कार्बन डाइऑक्साइड के 6 अणु एक 5 कार्बन यौगिक राइबुलोज बाइफॉस्फेट (RuBP) के 6 अणुओं से अभिक्रिया करती है जिसके फलस्वरूप एक अस्थायी 6 कार्बन यौगिक का निर्माण होता है जो शीघ्र ही वियोजित होकर 3 कार्बन यौगिक फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के 12 अणु बना देता है।
यह पर कार्बोक्सीलेशन कहलाता है।
(ii) ग्लाइकोलिटिक रिवर्सल-द्वितीय पद में फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के 12 अणु अवकृत होकर फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड के 12 अणु बना देते हैं। इस क्रिया में अर्थात् PGA से PGAL बनने में प्रकाश अभिक्रिया में बनी एसीमिलेटरी पॉवर (स्वांगीकरण शक्ति) ATP तथा NADPH का प्रयोग होता है।
फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड (PGAL) के 2 अणु संयोजित होकर पहले फ्रक्टोज 2-6 डाइफॉस्फेट व बाद में 6 कार्बन यौगिक ग्लूकोज का निर्माण कर देते हैं।
(चूँकि यह पद श्वसन की ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया के ठीक विपरीत है अतः ग्लाइकोलिटिक प्रतिलोमन कहलाते हैं।
यह पद अपचयन (रिडक्शन) भी कहलाता है।
(iii) रीजेनेरेशन (पुनरुद्भवन)-शेष बचे PGAL अणुओं का प्रयोग 5C यौगिक RuBP के पुनरुद्भवन या रीजेनेरेशन में होता है। इस पद हेतु भी ATP आवश्यक होती है। इस चरण का रीजेनेरेशन ऑफ RuBP कहते हैं।
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