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PHYSICS
विद्युत् परिपथ खींचकर समझाइ़ए वि P.N.P ट...

विद्युत् परिपथ खींचकर समझाइ़ए वि P.N.P ट्रांजिस्टर को उभयनिष्ठ आधार विधा में प्रवर्धक की भांति उपयोग में कैसे लाया जाता है ? धारा लाभ, वोल्टेज लाभ तथा शक्ति लाभ के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए।

लिखित उत्तर

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उभयनिष्ठ आधार विधा में P-N- P ट्रांजिस्टर का प्रवर्धक की भाँति उपयोग-इसके लिए चित्र के अनुसार विद्युत् परिपथ बनाते हैं। इसमें आधार सन्धि अग्र अभिनति और आधार-संग्राहक उत्क्रम अभिनति होता है, अर्थात् आधार को उत्सर्जक के सापेक्ष ऋणात्मक विभव पर तथा संग्राहक के सापेक्ष धनात्मक विभव पर रखा जाता है।
निवेशी सिगनल को, जिसका आवर्धन करना होता है, उत्सर्जक और आधार के बीच लगाते हैं तथा संग्राहक परिपथ में उच्च प्रतिरोध R (लोड) जोड़ देते हैं।
कार्य-विधि-चित्र से स्पष्ट है कि यदि संग्राहक धारा `I_(c)` हो, तो
`" "`संग्राहक बोल्टेज `V_(c)=V_(cb)-I_(c)R" "...(1)`
निवेशी सिगनल के धनात्मक अर्द्ध-चक्र में आधार के सापेक्ष उत्सर्जक का विभव अधिक धनात्मक होता है, जिससे संग्राहक धारा `।_(c)` का मान बढ़ जाता है। अत: समी. (1) के अनुसार संग्राहक वोल्टेज `V_(cb)` का मान कम धनात्मक निर्गत सिगनल प्राप्त होता है।

निवेशी सिगनल के ऋणात्मक अर्द्ध-चक्र में आधार के सापेक्ष उत्सर्जक कम धनात्मक होता है, जिससे संग्राहक धारा `I_(c)` का मान कम हो जाता है। अत: समी. (1) के अनुसार संग्राहक वोल्टेज `V_(c)` का मान बढ़ जाता है अर्थात् संग्राहक अधिक ऋणात्मक हो जाता है। फलस्वरूप ऋणात्मक निर्गत सिगनल प्राप्त होता है।
इस प्रकार निवेशी सिगनल के धनात्मक अर्द्ध चक्र में निर्गत सिगनल का धनात्मक अर्द्ध-चक्र तथा निवेशी सिगनल के ऋणात्मक अर्द्ध-चक्र में निर्गत सिगनल का ऋणात्मक अद्ध-चक्र प्राप्त होता है। अत: निवेशी सिगनल और निर्गत सिगनल समान कला में होते हैं।
धारा लाभ-संग्राहक धारा में परिवर्तन और उत्सर्जक धारा में परिवर्तन के अनुपात को जबकि संग्राहक वोल्टेज नियत हो, धारा लाभ कहते हैं। इसे `alpha` से प्रदर्शित करते हैं।
इस प्रकार, धारा लाभ `alpha=((DeltaI_(c))/(DeltaI_(e)))_(V_(C)"नियत")`
वोल्टेज लाभ-निर्गत वोल्टेज में परिवर्तन और निवेशी वोल्टेज में परिवर्तन के अनुपात को वोल्टेज लाभ कहते हैं।
यदि निवेशी वोल्टेज में परिवर्तन `DeltaV_("in")` तथा निर्गत वोल्टेज में परिवर्तन `DeltaV_("out")` हो, तो
वोल्टेज लाभ `A_(v)=(DeltaV_("out"))/(DeltaV_("in"))`
`=(DeltaI_(c).R_("out"))/(DeltaI_(e).R_("in"))=alphaxx(R_("out"))/(R_("in"))`
अतः शक्ति लाभ = धारा लाभ `xx` वोल्टेज लाभ
`=alpha xx alpha xx (R_("out"))/(R_("in"))=alpha^(2)xx(R_("out"))/(R_("in""))`
जहाँ `R_("in")` निवेशी तथा `R_("out")` निर्गत प्रतिरोध है ।
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