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BIOLOGY
आवृतबीजी पादप में निषेचन का संक्षेप में ...

आवृतबीजी पादप में निषेचन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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निषेचन के बाद भ्रूणकोष में उपस्थित कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तनों को समझाइए। निषेचन (Fertilisertion)-नर एवं मादा युग्मकों के संलयन (Fusion) को निपेचन कहा जाता है। निषेचन क्रिया का अध्ययन सर्वप्रथम स्ट्रासबर्गर (Strasburger, 1884) ने लिलियम (Lilium) पादप में किया था।
परागण की क्रिया द्वारा परागकण वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँच जाते हैं और वर्तिकान से कुछ पदार्थों का अवशोषण करके फूल जाते हैं। परागकण की अन्तश्चोल (Intine) परागनलिका के रूप में जनन छिद्र से निकलकर वर्तिका के ऊतकों में प्रवेश कर जाती है। परागनलिका वर्तिका के ऊतकों के भेदती हुई बीजाण्ड की ओर वृद्धि करती है। इस समय परागनलिका में दो नर युग्मक तथा एक कायिक केन्द्रक होता है।
परागनलिका बीजाण्ड में बीजाण्डद्वार, निभागीय छोर अथवा अध्यावरणों से होकर प्रवेश कर जाती है और भ्रूणकोष में किसी एक सहायक कोशिका को नष्ट करती हुई प्रवेश करके दोनों नर युग्मकों को छोड़ देती है।
भ्रूणकोष (Embryo sac) में पहुंचे दोनों नर युग्मकों में से एक नर युग्मक (Male gamete) अण्डकोशिका (Egg cell) में प्रवेश करता है अण्ड कोशिका का अगुणित केन्द्रक तथा नर युग्मक आपस में संलयन करते हैं फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (Zygote) बनता है। इस प्रक्रिया को सत्य निषेचन (True fertilization) कहते हैं। दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्रक के पास पहुँचकर इससे संलयन करता है जिससे त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (Triploid primary endosperm nucleus) का निर्माण होता है। इसमें तीन केन्द्रकों का संलयन होता है, इसे त्रिक संलयन (Triple fusion) कहते हैं। चूँकि भ्रूणकोष में निषेचन की क्रिया दो बार होती है एक अण्ड कोशिका से तथा दूसरी द्वितीयक केन्द्रक से, इसलिए इसे द्विनिषेचन कहते हैं।
निषेचन के पश्चात भ्रूणकोष कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तननिषेचन के पश्चात् दोनों सहायक कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। अण्ड कोशिका निषेचन के फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज बनाती है जो कि परिवर्धन करके भ्रूण (Embryo) में विकसित होता है। प्रतिमुखी कोशिकाएँ (Antipodal cells) भी नष्ट हो जाती हैं। केन्द्रीय कोशिका में त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक विभिन्न विभाजनों एवं प्रावस्थाओं द्वारा भ्रूणपोष का निर्माण करता है जो वृद्धिशील भ्रूण के पोषण में काम आता है।
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