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BIOLOGY
परासरणी विभव, दाब विभव तथा जल विभव की व्...

परासरणी विभव, दाब विभव तथा जल विभव की व्याख्या कीजिए तथा इनके पारस्परिक सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।

लिखित उत्तर

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परासरणी विभव (Osmotic Potential)-किसी विलयन का परासरण दाब (Oamotic Pressure) उसमें उपस्थित विलेय के अणुओं के कारण होता है तथा विलेय के अणुओं का जल में मिलने पर जलविभव कम होता है। अत: हम कह सकते हैं कि किसी विलयन का परासरणी दाब उसके जल विभव से कम होने का सूचक होता है। ऊष्मागतिक शब्दावली में इसे परासरण विभव (Osmotic Potential) कहते हैं। इसे ५ से व्यक्त करते हैं। परासरण विभव का मान ऋणात्मक होता है।
दाब विभव (Pressure Potential)-कोशिका में स्फीति दाब जल के अणुओं को अन्दर आने से रोकता है। स्फीति दाब द्वारा जल विभव में हुए प्रभाव को दाब विभव (Pressure potetnial) कहते हैं। इसे 'pp से प्रदर्शित करते हैं।
जल विभव (Water Potential)- यदि कोशिका को जल में रखा जाए तो शुद्ध जल के अणु तथा कोशिका में विलयन में उपस्थित जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा के मध्य के अन्तर को उस तन्त्र का जलविभव (Water potential) कहते हैं। इसे `Psi` w से प्रदर्शित करते हैं।
परासरण विभव, दाब विभव तथा जल विभव में सम्बन्ध (Relation between osmotic potential, pressure potential and water potential)
जल विभव (w) = 48 (परासरण विभव) + `Pis_(p)` (दाब विभव)
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