Home
Class 12
BIOLOGY
मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन ...

मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

मानव का उत्सर्जन तन्त्र-मानव के प्रमुख उत्सर्जी अंग वृक्क होते हैं। वृक्कों के अलावा मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्र मार्ग भी उत्सर्जन क्रिया को सम्पन्न करते हैं।
वृक्क-मनुष्य में एक जोड़ी वृक्क पाये जाते हैं। ये उदरगुहा के पृष्ठ भाग में कशेरुक दण्ड के दोनों ओर स्थित होते हैं। दाहिना वृक्क बायें वृक्क से थोड़ा-सा आगे स्थित होता है। दोनों वृक्क एक महीन पेरिटोनियम झिल्लीनुमा वलन के माध्यम से उदरगुहा की पृष्ठ भित्ति से जुड़े रहते हैं। वृक्क का निर्माण भ्रूणीय मीसोडर्म से होता है। मानव वृक्क पश्चवृक्क अथवा मेटानेफ्रिक प्रकार के होते हैं। मनुष्य के वृक्क गहरे लाल रंग और सेम की बीज जैसी आकृति के होते हैं। मनुष्य का प्रत्येक वृक्क लगभग 10-11 सेमी. लम्बा, 5-6 सेमी. चौड़ा, 2-5-3 सेमी. मोटा और लगभग 120-170 ग्राम वजनीय होता है। वृक्क का बाहरी तल उत्तल और भीतरी तल अवतल होता है। अवतल सतह की तरफ एक गड्ढे जैसी संरचना होती है जिसे वृक्क नाभि या हाइलम कहा जाता है। हाइलम वाले हिस्से से वृक्क धमनी और तन्त्रिका वृक्क में प्रवेश करती है। वृक्क शिरा , लसिका वाहिनी एवं मूत्रवाहिनी वृक्क से बाहर निकलती हैं। वृक्क के ऊपरी हिस्से को अधिवृक्क ग्रन्थि, जो कि अन्तःस्रावी ग्रन्थि है, टोपीनुमा आकार में ढके रहती है।
मूत्र वाहिनियाँ- यह प्रत्येक वृक्क की नाभि से निकलती है। यह पेशीय भित्ति से निर्मित, लम्बी और सँकरी नलिका होती है। इसका वृक्क में स्थित प्रारम्भिक भाग चौड़ा और कीपनुमा होता है। इसको वृक्क श्रोणि कहते हैं। पेल्विस से शुरू होकर दोनों मूत्र वाहिनियाँ नीचे की ओर जाकर मूत्राशय में खुलती हैं। मूत्र वाहिनियों की भित्ति मोटी और पेशीय होती है। पेशियाँ वाहिनियों में मूत्र को आगे बढ़ाने के लिए क्रमाकुंचक तरंगें पैदा करती हैं।
मूत्राशय- यह एक थैले के समान पेशीय संरचना होती है। मूत्राशय में मूत्र का स्थाई रूप से संग्रह होता है। मूत्राशय की भित्ति में तीन स्तर पाये जाते हैं-
(i) बाह्यस्तर-यह पेरीटोनियम का सीरोसा स्तर होता है।
(ii) मध्य स्तर-यह अरेखित पेशी का स्तर होता है।
(iii) आन्तरिक स्तर-यह श्लेष्मिक स्तर होता है।
मूत्राशय का आकार शंकुरूपी होता है। इसका ऊपरी भाग चौड़ा तथा निचला भाग सँकरा होता है। सँकरा भाग एक छिद्र के माध्यम से मूत्रोजनन मार्ग (Urethra) में खुलता है। इस छिद्र में अरेखित पेशी से निर्मित अवरोधनी (Sphincter) पायी जाती है। नर में मूत्राशय मलाशय (Rectum) से आगे और मादा में योनि (Vagina) के ऊपर अवस्थित होता है। मूत्राशय में 700-800 मिली. मूत्र का संग्रह होता है।
मूत्रमार्ग (Urethra)-मूत्राशय की ग्रीवा से निकलने वाली पतली नलिका को मूत्रमार्ग (Urethra) कहते हैं। मूत्र मार्ग द्वारा ही मूत्र शरीर से बाहर निकलता है। मूत्र मार्ग पर अवरोधनी पेशी शिथिल हो जाती है। इसके कारण मूत्र आसानी से बाहर निकल जाता है। पुरुषों में मूत्रमार्ग लगभग 15 सेमी. लम्बा होता है। यह शिश्न से होकर गुजरता है। स्त्रियों में मूत्रमार्ग लगभग 4 सेमी. लम्बा होता है।
नर में मूत्रमार्ग तीन भागों से निर्मित होता है, जिसका विवरण निम्नलिखित है-
(a) प्रोस्टेट भाग या यूरिथल भाग- इसकी लम्बाई 2.5 सेमी. होती है। यह प्रोस्टेट ग्रन्थि के बीच से गुजरता है। दोनों शुक्रवाहिनियाँ इसी भाग में खुलती है। (b) झिल्लीनुमा भाग- प्रोस्टेट ग्रन्थि और शिश्न के बीच का यह छोटा भाग होता है।
(c) शिश्नी भाग- यह लगभग 15 सेंमी. लम्बा मार्ग है। यह शिश्न (Penis) के कार्पस स्पंजियोसम से निकलकर शिश्न मुण्ड के ऊपरी छोर पर बाह्य मूत्र छिद्र के रूप में बाहर खुलता है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • मानव का उत्सर्जन तन्त्र

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|20 Videos
  • मानव का उत्सर्जन तन्त्र

    MITTAL PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर लघूत्तरात्मक प्रश्न|5 Videos
  • मानव का अध्यावरणी तन्त्र

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन प्रतियोगी परिक्षाओं के लिए प्रश्न -बहुविकल्पीय प्रश्न|20 Videos
  • मानव का जनन तन्त्र

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|12 Videos
MITTAL PUBLICATION-मानव का उत्सर्जन तन्त्र-पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर निबन्धात्मक प्रश्न
  1. मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।

    Text Solution

    |