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BIOLOGY
मानव हृदय की आंतरिक संरचना और क्रियाविधि...

मानव हृदय की आंतरिक संरचना और क्रियाविधि का सचित्र वर्णन करें।

लिखित उत्तर

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शुक्राणु जनन (स्पेर्माटोगेनेसिस)- शुक्राणु जनन की क्रिया में वृषणों (Testis) में आद्य जनन कोशिकाओं द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण होता है । कशेरुकी प्रणालियों में शुक्रजनन सतत प्रक्रिया के रूप में होता है । इसमें 74 दिन का समय लगता हैं।
,1।शुक्राणुपर्व(Spermatid) का निर्माण- इसमें आद्य जनन कोशिकाएँ (Primordial germ cells) स्पर्मेटिड्स का निर्माण तीन चरणों में करती हैं-(a) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)- इस अवस्था में शुक्राणुमृतक या पुंजंन कोशिकाओं का निर्माण आद्य जनन कोशिका के सूत्री विभाजन द्वारा होता है । ये कोशिकाएँ द्विगुणित होती हैं।
,(b) वृद्धि प्रावस्था (growth phase)- इस अवस्था में स्पर्म्टोगेनिआ आकर में वृद्धि कर लेती है तब प्राथमिक शुक्राणुजनन (primary Spermatocyte) कोशिका कहलाती हैं, जो की द्विगुणित होती हैं।,शुक्राणुजन : शुक्राणुपूर्व का विभेदीकरण - अगुणित पूर्व शुक्राणुओं में विभेदीकरण क्रिया के परिणामस्वरूप हुई क्रिया को शुक्रजन शुक्रकयणहरण अथवा स्पेर्म्टीलियोसिस कहते है । इसके पश्च्चात अनेकों परिवर्तनों से पूर्व-शुक्राणु (Spermatids) शुक्राणुओं (Spermatozoa) में विभेदित हो जाते हैं, जिनमें केन्द्रक , केन्द्रक द्रव आदि के जल के निकल जाने पर सभी गुणसूत्र छोटे से स्थान में व्यवस्थित हो जाते हैं।
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