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BIOLOGY
क्लोनिंग वाहक क्या है ? पुनर्योगज डी.न.ए...

क्लोनिंग वाहक क्या है ? पुनर्योगज डी.न.ए. प्रौद्योगिकी में काम आने वाले विभित्र वाहको का संक्षिप्त वर्णन कीजिए

लिखित उत्तर

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पुनर्योगज पद्धति में वांछित जीन को पृथक करने के पश्चात् एक वाहक की आवश्यकता होती है जो वांछित जीन सहित परपोषी में प्रवेश डी.न.ए . की कर सके
प्रमुख वाहक DNA निम्नलिखित है -
(i) प्लाजिमद- इनमे निम्नलिखित विशेषताएं होती है -
(a) ये जीवाणु कोशिका में गुणसूत्र के अतिरिक्त पाए जाते है |
(b)ये वृताकार तथा द्विरज्जुकी , सर्पिलाकार अणु होता है
(c) ये अपनी पुनरावृति करने के लिए स्वतंत्र होते है
(d) ये जीवाणु की वृद्धि व उसके जीवित रहने के लिए आवश्यक नही है
(e) इनमे विशिष्ट प्रतिबंध स्थल होती है, जहाँ वांछित जीन का निवेश कराया जाता है
(f) इनमे चिन्हित स्थल उपलब्ध होते है
(g) प्लाजिमड में तीन जीन से लेकर हज़ार जीन तक हो सकती है

(ii) जीवाणुभोजी- वे वाइरस जो जीवाणु को संक्रमित करते है जीवाणुभोजी कहलाते है उदाहरण लैम्ब्डा (lambda) व M13
. प्लाजिमड की तुलना में जीवाणुभोजी एक बेहतर वाहक है क्योकि इसमें निम्न विशेषताएं पायी जाती है
(a) इसमें बड़े डी.न .ए . खंड (24 KB) की क्लोनिंग की जा सकती है
(b)प्र्त्येक जीवाणु भोजी से क प्लाक क्षेत्र उत्पन होता है जिससे इनका परीक्षण अपेक्षाकृत आसान है
कॉस्मिड - यह प्लाजिमड तथा लेम्ब्डा फेज़ का संकर है इसमें प्लाजिमड व लैम्डा जीवाणु भोजी दोनों गुण होते है कॉस्मिड, जीवाणु कोशिका में प्लाज्मिड की तरह पुनरावृत करते है तथा कोस स्थल के कारण इनकी पेकिंग लेमड़ा कणो की भांति होती है
उदाहरण - कॉस्मिड `P^(LFR-5)` इस कॉस्मिड में दो कोस स्थल प्रतिबंध एंजाइम स्थल पुनरावृति उत्पत्ति स्थल व टेट्रासाइक्लिन प्रतिरिधक जीन उपस्थित होते है
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